मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड से जुड़े मसौदा विधेयक को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 19 जुलाई 2026 को भोपाल के जगदीशपुर में आयोजित विशेष कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकृति दी गई।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद प्रस्तावित समान नागरिक संहिता विधेयक को 20 जुलाई से शुरू हुए मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाना है। विधानसभा से पारित होने, राज्यपाल की स्वीकृति और सरकारी अधिसूचना जारी होने के बाद ही इसके प्रावधान लागू होंगे।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे महिलाओं के सशक्तीकरण और सभी समुदायों को समान नागरिक अधिकार प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित कानून का उद्देश्य धर्म और समुदाय के आधार पर अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति, गोद लेने और पारिवारिक मामलों में समान व्यवस्था स्थापित करना है।
UCC विधेयक में किन विषयों को किया गया शामिल?
प्रस्तावित विधेयक में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति के अधिकार, गोद लेने, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे व्यक्तिगत एवं पारिवारिक मामलों को शामिल किया गया है।
सरकार के अनुसार, समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद विभिन्न धर्मों और समुदायों के नागरिकों के लिए इन मामलों में एक जैसी कानूनी प्रक्रिया निर्धारित की जाएगी। हालांकि अंतिम नियम विधेयक के विधानसभा से पारित होने और आधिकारिक पाठ प्रकाशित होने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होंगे।
UCC को सभी धर्मों का समर्थन मिला है…
हर्ष का विषय है कि UCC सुझाव समिति के अनुसार 80% से अधिक हमारी मुस्लिम बहनों एवं 40% हमारे मुस्लिम भाइयों ने भी समान नागरिक संहिता के पक्ष में अपना समर्थन दिया है।#UniformCivilCode #UCC #cabinetdecision pic.twitter.com/ZHgIzR05Xz
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) July 19, 2026
विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य
मसौदा विधेयक में सभी धर्मों और समुदायों के लोगों के लिए विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। सरकार पंजीकरण व्यवस्था को गांव और स्थानीय निकाय स्तर तक उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है, ताकि नागरिकों को इसके लिए जिला मुख्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत किसी भी विवाह या तलाक को कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दर्ज कराना होगा। केवल धार्मिक या मौखिक प्रक्रिया के आधार पर वैवाहिक संबंध समाप्त नहीं माना जाएगा।
बहुविवाह पर प्रतिबंध का प्रस्ताव
UCC के मसौदे में एक समय में एक से अधिक विवाह करने पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान शामिल बताया गया है। कोई व्यक्ति दूसरा विवाह तभी कर सकेगा, जब उसका पहला विवाह कानूनी रूप से समाप्त हो चुका हो या उसके जीवनसाथी की मृत्यु हो गई हो।
इस व्यवस्था का उद्देश्य सभी समुदायों के पुरुषों और महिलाओं के लिए विवाह संबंधी समान नियम लागू करना बताया गया है।
तीन तलाक और निकाह हलाला पर सख्ती
प्रस्तावित कानून में तत्काल तीन तलाक जैसी प्रथाओं को मान्यता नहीं देने की बात कही गई है। केवल तीन बार ‘तलाक’ कह देने से विवाह समाप्त नहीं होगा और तलाक के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी।
निकाह हलाला जैसी प्रथाओं पर भी प्रतिबंध लगाने और उल्लंघन को दंडनीय बनाने का प्रस्ताव मसौदे में शामिल होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि इससे संबंधित दंड और विस्तृत कानूनी प्रावधान विधेयक का आधिकारिक पाठ सार्वजनिक होने के बाद स्पष्ट होंगे।
लिव-इन रिलेशनशिप का कराना होगा पंजीकरण
मध्य प्रदेश के प्रस्तावित UCC विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। साथ रहने वाले जोड़ों को निर्धारित अवधि के भीतर संबंधित प्राधिकारी के सामने अपने रिश्ते का पंजीकरण कराना पड़ सकता है।
बिना पंजीकरण के लिव-इन रिलेशनशिप में रहने पर कानूनी कार्रवाई या जुर्माने का प्रावधान किया जा सकता है। ऐसे संबंधों से जन्म लेने वाले बच्चों को वैध संतान का दर्जा देने तथा महिला और बच्चों के भरण-पोषण के अधिकार सुरक्षित करने का प्रस्ताव भी बताया गया है।
बेटे और बेटी को संपत्ति में समान अधिकार
विधेयक के प्रमुख उद्देश्यों में महिलाओं और पुरुषों को संपत्ति तथा उत्तराधिकार में समान अधिकार देना शामिल है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत बेटा और बेटी दोनों पैतृक एवं पारिवारिक संपत्ति में समान अधिकार रखेंगे।
पति-पत्नी के अधिकारों में समानता और आश्रित महिला तथा बच्चों के भरण-पोषण को लेकर भी स्पष्ट कानूनी व्यवस्था बनाने की बात कही गई है।
अनुसूचित जनजातियों को कानून से छूट
मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के अनुसूचित जनजातीय समुदायों को प्रस्तावित समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखने का निर्णय किया है। सरकार का कहना है कि जनजातीय समाज की विशिष्ट परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण के लिए यह छूट दी गई है।
मध्य प्रदेश में जनजातीय आबादी का अनुपात काफी अधिक है। ऐसे में अनुसूचित जनजातियों को दी गई छूट राज्य में UCC के कार्यान्वयन का एक महत्वपूर्ण पहलू होगी।
जनता से लिए गए सुझाव
राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की थी। समिति ने विभिन्न जिलों में नागरिकों, सामाजिक संगठनों, धार्मिक प्रतिनिधियों, कानूनी विशेषज्ञों और राजनीतिक दलों से सुझाव लिए।
मुख्यमंत्री मोहन यादव के अनुसार, परामर्श प्रक्रिया के दौरान मुस्लिम समुदाय से भी सकारात्मक सुझाव मिले। सरकार ने दावा किया है कि समिति के सामने अपनी राय रखने वाली लगभग 80 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं और 40 प्रतिशत मुस्लिम पुरुषों ने प्रस्तावित कानून का समर्थन किया।
उत्तराखंड और गुजरात के मॉडल का अध्ययन
मध्य प्रदेश की समिति ने मसौदा तैयार करने के दौरान उत्तराखंड और गुजरात सहित अन्य राज्यों में समान नागरिक संहिता से संबंधित व्यवस्थाओं का अध्ययन किया। इसके बाद मध्य प्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और जनजातीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर राज्य का मसौदा तैयार किया गया।
उत्तराखंड स्वतंत्र भारत का पहला राज्य है, जहां समान नागरिक संहिता लागू की गई। गोवा में पुर्तगाली शासन से चली आ रही समान नागरिक व्यवस्था पहले से लागू है। गुजरात सहित कुछ अन्य राज्यों ने भी UCC को लेकर विधायी प्रक्रिया आगे बढ़ाई है।
अभी कानून लागू नहीं हुआ
यह ध्यान रखना जरूरी है कि मध्य प्रदेश कैबिनेट ने फिलहाल UCC के मसौदा विधेयक को मंजूरी दी है। कानून को लागू करने से पहले इसे विधानसभा में पारित कराना होगा। इसके बाद राज्यपाल की स्वीकृति, अधिसूचना और नियमावली तैयार करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
विधानसभा में चर्चा के दौरान विधेयक के कुछ प्रावधानों में संशोधन भी हो सकता है। इसलिए पंजीकरण की समय-सीमा, जुर्माने, सजा और संबंधित अधिकारियों की शक्तियों की अंतिम जानकारी आधिकारिक विधेयक तथा नियमावली जारी होने के बाद ही सामने आएगी।
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