पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने सोमवार, 20 जुलाई 2026 को लगातार नौवीं रात ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और अमेरिका के सहयोगी देशों को निशाना बनाया है। लगातार बढ़ते हमलों के कारण पूरे क्षेत्र में व्यापक युद्ध फैलने की आशंका गहरा गई है।
मजबूत स्थिति में पहुंचने के बाद ही बातचीत करेगा ईरान
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए को दिए इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका के साथ संघर्ष को समाप्त करने या बातचीत शुरू करने का फैसला तभी किया जाना चाहिए, जब ईरान युद्ध के मैदान में मजबूत स्थिति में हो।
अराघची के मुताबिक किसी भी युद्ध का अंत आमतौर पर दो तरीकों से होता है। पहला, जब किसी एक पक्ष को निर्णायक सैन्य जीत हासिल हो जाए और दूसरा, जब दोनों पक्ष बातचीत के जरिए किसी समझौते पर पहुंचें। हालांकि उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जल्दबाजी में बातचीत करना ईरान के हित में नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि संघर्ष के दौरान ईरान को लगातार यह आकलन करना होगा कि युद्ध जारी रखने से देश को कितना लाभ और कितना नुकसान हो रहा है। लोगों की जान, राष्ट्रीय सुरक्षा और देश के भविष्य को खतरे में डालकर कोई फैसला नहीं लिया जा सकता।
अराघची का दावा है कि नुकसान उठाने के बावजूद इस संघर्ष के बाद ईरान वैश्विक और क्षेत्रीय राजनीति में पहले से अधिक मजबूत पक्ष के रूप में उभरा है। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका और ईरान दोनों ने कूटनीतिक रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया है तथा पाकिस्तान और कतर जैसे देश मध्यस्थता की कोशिशों में शामिल हैं।
अमेरिका ने किन ठिकानों को बनाया निशाना?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार नौवीं रात किए गए हमलों में ईरान के सैन्य कमांड सेंटर, वायु रक्षा प्रणाली, मिसाइल ठिकानों, ड्रोन लॉन्चिंग साइट और सैन्य संचार नेटवर्क को निशाना बनाया गया।
उत्तर-पश्चिमी ईरान के तबरीज क्षेत्र में स्थित मिसाइल प्रतिष्ठानों पर भी हमले की खबर है। इस इलाके में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की एयरोस्पेस फोर्स से जुड़े महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने और कथित भूमिगत मिसाइल सुविधाएं मौजूद हैं।
इससे एक दिन पहले अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने लगातार आठवीं रात ईरान पर हमले पूरे किए जाने की जानकारी सार्वजनिक की थी।
ईरानी ड्रोन नष्ट करते समय अमेरिकी सैनिक की मौत
उत्तरी इराक में बिना फटे ईरानी ड्रोन को नियंत्रित तरीके से नष्ट करने के दौरान एक अमेरिकी सैनिक की मौत हो गई। घटना में एक अन्य सैनिक घायल हुआ है, जिसका इलाज किया जा रहा है।
इसके बाद ईरान युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैन्यकर्मियों की आधिकारिक संख्या बढ़कर 17 हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार इन मौतों में ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों के साथ सैन्य विमान तथा हेलिकॉप्टर दुर्घटनाओं में मारे गए सैनिक भी शामिल हैं।
खाड़ी देशों में ईरान के जवाबी हमले
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने कुवैत, बहरीन, जॉर्डन और क्षेत्र में मौजूद अन्य अमेरिकी सैन्य ठिकानों तथा रणनीतिक प्रतिष्ठानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। हमलों के कारण खाड़ी देशों में सैन्य प्रतिष्ठानों, तेल मार्गों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमलों और आवाजाही में बाधा पड़ने से वैश्विक तेल बाजार भी प्रभावित हुआ है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में शामिल है। मौजूदा तनाव के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है।
ईरानी कमांडर ने अमेरिका को दी कड़ी चेतावनी
ईरान के खातम अल-अंबिया सेंट्रल मुख्यालय के कमांडर मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने अमेरिका पर ईरानी जनता और अधिकारियों के बीच फूट डालने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि सैन्य दबाव में सफलता नहीं मिलने के बाद ईरान के विरोधी देश की आंतरिक एकता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। अब्दुल्लाही ने चेतावनी दी कि ईरान के खिलाफ किसी भी नई सैन्य कार्रवाई, दबाव या विस्तारवादी कदम का उसकी सशस्त्र सेनाएं निर्णायक और नुकसान पहुंचाने वाला जवाब देंगी।
पूरे पश्चिम एशिया पर मंडराया बड़े युद्ध का खतरा
अमेरिका और ईरान के बीच हमलों का दायरा ईरानी सैन्य ठिकानों से आगे बढ़कर इराक, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और होर्मुज जलडमरूमध्य तक पहुंच गया है। इससे क्षेत्रीय युद्ध, तेल आपूर्ति में रुकावट और खाड़ी देशों के जल तथा ऊर्जा संयंत्रों पर हमलों का खतरा बढ़ गया है।
दोनों पक्ष फिलहाल अपने हमले रोकने के संकेत नहीं दे रहे हैं। हालांकि पर्दे के पीछे बातचीत की कोशिशें जारी होने की खबरें हैं। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि संघर्ष कूटनीतिक समझौते की ओर बढ़ता है या पश्चिम एशिया एक और व्यापक युद्ध की चपेट में आता है।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel