ईरान में चल रहे आर्थिक आंदोलनों के बीच महिलाओं की कुछ तस्वीरें और वीडियो पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गए हैं। सड़कों पर नारेबाज़ी, आगजनी और सुरक्षाबलों के साथ झड़पों के बीच ईरानी महिलाएँ देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की तस्वीरें जला रही हैं और उन्हीं से सिगरेट सुलगाती नजर आ रही हैं। विरोध का यह तरीका सिर्फ सत्ता के खिलाफ नहीं, बल्कि सामाजिक बंदिशों को खुली चुनौती देने का प्रतीक बन गया है।
यह विरोध ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहा है। बढ़ती महँगाई, बेरोजगारी और गिरती अर्थव्यवस्था ने आम लोगों के गुस्से को सड़कों पर ला दिया है। शुरुआत में ये प्रदर्शन आर्थिक माँगों तक सीमित थे, लेकिन अब इनका स्वर पूरी राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ होता जा रहा है। कई इलाकों में प्रदर्शनकारी सुधार नहीं, बल्कि इस्लामिक रिपब्लिक को ही नकारने की बात करते दिखाई दे रहे हैं।
यह ईरानी महिलाओं में अब रुकने वाला नहीं ट्रेंड है।
ईरानी महिलाएं सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की जलती हुई तस्वीरों से सिगरेट जला रही हैं।
यह सिर्फ शॉक वैल्यू नहीं है। यह एक स्पष्ट राजनीतिक इशारा है ऐसे शासन के प्रति खुला तिरस्कार, जिसने दशकों से महिलाओं के शरीर, कपड़ों, व्यवहार और… pic.twitter.com/6AgRoFZhHR
— One India News (@oneindianewscom) January 10, 2026
महिलाओं की इस मुखर भूमिका को तीन साल पहले महसा अमीनी की मौत के बाद हुए हिजाब विरोधी आंदोलन की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। तब से लेकर अब तक महिलाओं का विरोध सिर्फ कपड़ों या नियमों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने सत्ता और नियंत्रण के पूरे ढाँचे को चुनौती देनी शुरू कर दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सिगरेट यहाँ सिर्फ एक वस्तु नहीं, बल्कि विरोध का गहरा प्रतीक है। ईरान में महिलाओं के धूम्रपान को लंबे समय से सामाजिक और कानूनी तौर पर हतोत्साहित किया जाता रहा है। ऐसे में सार्वजनिक रूप से सिगरेट जलाना और वह भी सर्वोच्च नेता की तस्वीर से, दोहरी बगावत का संकेत देता है—एक तरफ राजनीतिक सत्ता के खिलाफ और दूसरी तरफ सामाजिक नियंत्रण के विरुद्ध।
ईरानी कानून के तहत सर्वोच्च नेता की तस्वीर जलाना गंभीर अपराध माना जाता है। इसके बावजूद इस तरह के वीडियो और तस्वीरों का सामने आना यह दिखाता है कि डर की दीवार कमजोर पड़ रही है। प्रशासन ने विरोध को दबाने के लिए सख्ती बढ़ाई है, इंटरनेट पर नियंत्रण कड़ा किया गया है और चेतावनियाँ जारी की गई हैं। बावजूद इसके, प्रतीकात्मक विरोध रुकता नजर नहीं आ रहा।
स्थानीय लोगों और डॉक्टरों के अनुसार, हिंसा के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, लेकिन इसके बावजूद सड़कों पर उतरने वालों की संख्या कम नहीं हुई है। यह संकेत है कि ईरान में विरोध सिर्फ एक क्षणिक उबाल नहीं, बल्कि गहरे असंतोष का रूप ले चुका है, जिसमें महिलाएँ सबसे आगे दिखाई दे रही हैं।
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