महाराष्ट्र के Pune जिले के भोर तालुका में स्थित भाटघर बांध का जलस्तर कम होते ही सदियों पुराना Kambreshwar Temple एक बार फिर लोगों के सामने आ गया है। साल के अधिकांश समय पानी में डूबा रहने वाला यह प्राचीन मंदिर हर वर्ष कुछ समय के लिए ही दिखाई देता है, जिससे इसे देखने के लिए श्रद्धालुओं, पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है।
जलस्तर घटते ही सामने आता है मंदिर
भाटघर बांध, जिसे ब्रिटिश काल में बनाया गया था, इन दिनों कम जलस्तर के कारण चर्चा में है। जैसे-जैसे पानी कम होता है, वैसे-वैसे कांबरे गांव का यह ऐतिहासिक मंदिर धीरे-धीरे दिखाई देने लगता है।
- मानसून में मंदिर पूरी तरह जलमग्न हो जाता है
- गर्मियों में शिखर दिखाई देने लगता है
- मई-जून में पूरा मंदिर स्पष्ट नजर आता है
स्थानीय लोग हर साल मंदिर की सफाई कर पूजा-अर्चना शुरू करते हैं।
अंग्रेजों के दौर में पानी में समाया मंदिर
इतिहास के अनुसार:
- वर्ष 1928 में अंग्रेजों ने लॉयड डैम (भाटघर बांध) का निर्माण किया
- इसके बाद आसपास का क्षेत्र जलमग्न हो गया
- कांबरे गांव को दूसरी जगह बसाया गया, लेकिन मंदिर वहीं रह गया
तब से हर साल यह मंदिर बारिश में डूब जाता है और गर्मियों में फिर दिखाई देता है।

प्राचीन स्थापत्य का अनोखा नमूना
इतिहासकारों के मुताबिक:
- मंदिर बेहद प्राचीन है, जिसे कुछ लोग पांडव काल से जोड़ते हैं
- कई विशेषज्ञ इसे हेमाडपंती शैली का मानते हैं
मंदिर की खासियत:
- बड़े तराशे हुए पत्थरों से निर्माण
- बिना आधुनिक तकनीक के मजबूत संरचना
- वर्षों तक पानी में रहने के बावजूद स्थिर
इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण
कांबरेश्वर मंदिर इंजीनियरों और आर्किटेक्ट्स के लिए भी आकर्षण का केंद्र है।
- मजबूत नींव और संतुलित निर्माण
- पानी और मौसम के प्रभाव के बावजूद संरचना सुरक्षित
- प्राचीन भारतीय इंजीनियरिंग का जीवंत उदाहरण
रहस्यमयी गर्भगृह और जलमग्न शिवलिंग
मंदिर का सबसे खास हिस्सा इसका गर्भगृह है:
- अंदर हमेशा घुटनों तक पानी भरा रहता है
- पानी के बीच स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है
- श्रद्धालु पानी में उतरकर दर्शन करते हैं
मंदिर परिसर में:
- नंदी महाराज की प्रतिमा
- माता पार्वती की मूर्ति
- वीरगलों (शहीद स्मृति शिलाएं) की उपस्थिति
पर्यटन और आस्था का केंद्र
हर साल जब मंदिर पानी से बाहर आता है:
- हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं
- फोटोग्राफरों और पर्यटकों के लिए आकर्षण बनता है
- सूर्योदय और सूर्यास्त का दृश्य बेहद खूबसूरत होता है
स्थानीय प्रशासन लोगों से धार्मिक मर्यादा बनाए रखने की अपील करता है।
सदियों पुरानी विरासत की पहचान
कांबरेश्वर मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन संस्कृति, स्थापत्य कला और इंजीनियरिंग का जीवंत प्रतीक है।
पानी में वर्षों तक डूबे रहने के बावजूद इसका सुरक्षित रहना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जाता।
निष्कर्ष
भोर तालुका का यह प्राचीन शिव मंदिर हर साल कुछ समय के लिए सामने आकर इतिहास, आस्था और प्रकृति के अद्भुत संगम की झलक दिखाता है। यह मंदिर साबित करता है कि भारत की विरासत केवल अतीत नहीं, बल्कि आज भी जीवित और प्रेरणादायक है।
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