राजस्थान के सीमावर्ती जैसलमेर जिले में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े जासूसी नेटवर्क का खुलासा करने का दावा किया है। राजस्थान इंटेलिजेंस ने नाचना क्षेत्र के खरिया गाँव निवासी 26 वर्षीय मुस्ताक अली को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, वह पिछले करीब दो वर्षों से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के कथित संपर्क में था और सेना तथा सीमा सुरक्षा बल (BSF) की गतिविधियों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी पाकिस्तान तक पहुँचा रहा था।
मामले के सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जांच तेज कर दी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
चाय की दुकान की आड़ में चल रहा था कथित जासूसी नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार, मुस्ताक अली ने भारत-पाकिस्तान सीमा की ओर जाने वाली मुख्य सड़क पर एक चाय की दुकान संचालित कर रखी थी। आरोप है कि वह इसी दुकान को कवर के रूप में इस्तेमाल कर सेना और BSF के वाहनों की आवाजाही पर नजर रखता था।
बताया जा रहा है कि वह जवानों की मूवमेंट, सैन्य गतिविधियों और संवेदनशील क्षेत्रों से संबंधित फोटो और वीडियो अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड करता था। बाद में इन जानकारियों को डिजिटल माध्यमों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए पाकिस्तान में मौजूद कथित हैंडलर्स तक पहुँचाया जाता था।
इंटेलिजेंस की निगरानी में आया संदिग्ध व्यवहार
राजस्थान इंटेलिजेंस की नियमित निगरानी के दौरान मुस्ताक की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं। अधिकारियों के मुताबिक, उसके डिजिटल कम्युनिकेशन और ऑनलाइन संपर्कों की जांच में कई महत्वपूर्ण सुराग मिले।
प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले कि वह लगातार पाकिस्तान स्थित कुछ संदिग्ध व्यक्तियों के संपर्क में था। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने उसे हिरासत में लेकर गहन पूछताछ शुरू की।
जयपुर में संयुक्त पूछताछ केंद्र में हुई पूछताछ
गिरफ्तारी के बाद मुस्ताक अली को जयपुर स्थित संयुक्त पूछताछ केंद्र (Joint Interrogation Centre – JIC) ले जाया गया, जहां विभिन्न केंद्रीय और राज्य स्तरीय खुफिया एजेंसियों ने उससे पूछताछ की।
सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान उसके मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों से महत्वपूर्ण डेटा प्राप्त हुआ है, जिसकी फॉरेंसिक जांच की जा रही है।
मोबाइल डेटा से मिले अहम सुराग
जांच एजेंसियों का दावा है कि मोबाइल फोन से मिले डेटा में सैन्य गतिविधियों से जुड़े वीडियो, तस्वीरें और डिजिटल संवाद के प्रमाण मिले हैं। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि उसे विशेष रूप से सीमा क्षेत्र में गतिविधियों पर नजर रखने और जानकारी साझा करने के निर्देश दिए गए थे।
अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता और इसके पीछे एक व्यापक नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।
आर्थिक लेनदेन की भी जांच
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या मुस्ताक अली को कथित जासूसी गतिविधियों के बदले आर्थिक लाभ या अन्य प्रकार की सहायता मिली थी। उसके बैंक खातों, डिजिटल भुगतान रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है।
इसके साथ ही यह भी खंगाला जा रहा है कि उसके संपर्क में और कौन-कौन लोग थे तथा क्या किसी अन्य व्यक्ति ने भी संवेदनशील सूचनाएं साझा करने में भूमिका निभाई थी।
सीमावर्ती इलाकों में बढ़ाई गई सतर्कता
घटना सामने आने के बाद राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियों ने निगरानी बढ़ा दी है। खुफिया विभाग और सुरक्षा बल संभावित नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करने में जुटे हुए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी संदिग्ध गतिविधि को गंभीरता से लिया जाएगा और जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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