मध्य प्रदेश में 18 जून 2026 को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र जांच के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा निरस्त कर दिया गया। इस फैसले के बाद राज्य की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की संभावना लगभग तय मानी जा रही है।
नामांकन रद्द होने के बाद भाजपा के तीसरे उम्मीदवार महेश केवट की जीत का रास्ता साफ हो गया है। वहीं भाजपा के अन्य उम्मीदवार तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल भी बिना मुकाबले राज्यसभा पहुंचते दिखाई दे रहे हैं।
क्यों रद्द हुआ मीनाक्षी नटराजन का नामांकन?
राज्यसभा चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर और विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन इस आधार पर निरस्त किया कि उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में हैदराबाद की एक अदालत से जुड़े मामले की जानकारी नहीं दी थी।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2025 में हैदराबाद के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने एक निजी शिकायत के आधार पर मीनाक्षी नटराजन को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223 के तहत नोटिस जारी किया था। भाजपा उम्मीदवार महेश केवट ने इसी आधार पर आपत्ति दर्ज कराते हुए दावा किया कि उम्मीदवार ने आवश्यक जानकारी छिपाई है।
करीब साढ़े चार घंटे चली सुनवाई के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने भाजपा की आपत्ति को स्वीकार करते हुए कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन खारिज कर दिया।
कांग्रेस ने बताया लोकतंत्र की हत्या
नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस ने फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे लोकतंत्र और संविधान पर हमला करार देते हुए कहा कि भाजपा महिला सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों की बात करती है, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत है।
पटवारी ने आरोप लगाया कि निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं और कांग्रेस इस फैसले के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेगी।
उमंग सिंघार बोले- भाजपा को हार का डर था
मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि भाजपा को पहले से पता था कि कांग्रेस विधायक एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि जब भाजपा को लगा कि कांग्रेस में टूट की संभावना नहीं है, तब कानूनी प्रक्रियाओं का सहारा लेकर चुनावी समीकरण बदलने की कोशिश की गई।
मीनाक्षी नटराजन का आरोप- ‘सीट चोरी की राजनीति’
मीनाक्षी नटराजन ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा शुरू से ही राज्यसभा चुनाव में राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रही थी। उन्होंने कहा कि यह केवल एक उम्मीदवार का मामला नहीं बल्कि लोकतंत्र और संविधान से जुड़ा गंभीर विषय है।
उन्होंने आरोप लगाया कि उनके वकीलों द्वारा प्रस्तुत कानूनी तर्कों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया और पूर्व निर्धारित मानसिकता के तहत फैसला सुनाया गया।
कोर्ट जाएगी कांग्रेस
कांग्रेस के वरिष्ठ अधिवक्ता अजय गुप्ता ने कहा कि नामांकन निरस्त करने का आदेश कानून और न्यायिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने दावा किया कि BNSS की धारा 223 के तहत जारी नोटिस केवल सुनवाई का अवसर प्रदान करता है और इसे आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता।
कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वह इस फैसले को अदालत में चुनौती देगी।
विधानसभा और एयरपोर्ट पर हाई-वोल्टेज ड्रामा
मंगलवार को भोपाल विधानसभा परिसर में भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बीच जमकर राजनीतिक टकराव देखने को मिला। दोनों दलों के नेताओं और समर्थकों ने नारेबाजी की, जिसके बाद पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
दूसरी ओर कांग्रेस अपने विधायकों को संभावित क्रॉस वोटिंग से बचाने के लिए बेंगलुरु भेजने की तैयारी में थी। इसके लिए भोपाल एयरपोर्ट पर चार्टर्ड विमान भी तैयार था, लेकिन नामांकन रद्द होने की खबर आने के बाद यह योजना रद्द कर दी गई।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया फैसले का स्वागत
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रिटर्निंग ऑफिसर के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि चुनावी हलफनामे में पूरी जानकारी देना उम्मीदवार की जिम्मेदारी होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने जानबूझकर महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना लोकतंत्र के लिए आवश्यक है और उसी आधार पर निर्णय लिया गया है।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel