अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को निशाना बनाने से जुड़ी कथित आतंकी साजिश के मामले में सुरक्षा एजेंसियों को महत्वपूर्ण सफलता मिलने का दावा किया गया है। कर्नाटक के दावणगेरे जिले के हरिहर क्षेत्र से उत्तर प्रदेश निवासी सुहेल नाम के एक संदिग्ध युवक को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी पिछले करीब 15 दिनों से हरिहर तालुका के बन्नीकोडु गांव के पास रह रहा था और एक निजी फैक्ट्री में पेंटर के तौर पर काम कर रहा था। उसकी संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की और उसका मोबाइल फोन जब्त कर लिया।
जांच के दौरान फोन से कथित तौर पर पाकिस्तानी नंबर, संदिग्ध व्हाट्सऐप संपर्क, हथियारबंद लोगों की तस्वीरें और भारत विरोधी सामग्री मिलने की बात कही गई है। एक ऑडियो क्लिप में राम मंदिर को बम से उड़ाने जैसी बात सुनाई देने का भी दावा किया गया है। हालांकि, इन डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच अभी जारी है।
हरिहर इलाके से पकड़ा गया संदिग्ध
रिपोर्टों के अनुसार पुलिस को सूचना मिली थी कि उत्तर प्रदेश से आया एक व्यक्ति बन्नीकोडु गांव में संदिग्ध परिस्थितियों में रह रहा है। पुलिस टीम ने 23 जून को कारगिल फैक्ट्री और बन्नीकोडु गांव के बीच उसे रोककर पूछताछ की।
पूछताछ के दौरान युवक ने अपना नाम सुहेल बताया। वह क्षेत्र में रहने और अपनी गतिविधियों के बारे में पुलिस को संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया, जिसके बाद उसके मोबाइल फोन की प्रारंभिक जांच की गई।
पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर उसके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा और सांप्रदायिक सौहार्द से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। उसके मोबाइल को डिजिटल फॉरेंसिक जांच के लिए जब्त कर लिया गया है।
फोन में मिला पाकिस्तानी कोड वाला संपर्क
जांच अधिकारियों के मुताबिक आरोपी के मोबाइल में पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय कोड ‘+92’ वाला एक फोन नंबर मिला। यह नंबर कथित रूप से ‘राणा जी’ नाम से सेव किया गया था।
पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संबंधित नंबर किस व्यक्ति का है, आरोपी उससे कितनी बार संपर्क में आया और दोनों के बीच किस प्रकार की बातचीत हुई। कॉल रिकॉर्ड, इंटरनेट कॉलिंग का विवरण, व्हाट्सऐप चैट, वॉइस मैसेज और सोशल मीडिया गतिविधियों को जांच के दायरे में लिया गया है। आरोपी के बैंक खातों और संभावित वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा सकती है।
राम मंदिर पर हमले से जुड़ा कथित ऑडियो
मोबाइल फोन से बरामद ऑडियो क्लिप को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। पुलिस का दावा है कि हिंदी और उर्दू मिश्रित भाषा वाले एक ऑडियो में अयोध्या के राम मंदिर को बम से उड़ाने से संबंधित बात कही गई है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ऑडियो में सुनाई देने वाली आवाज आरोपी की ही है या किसी अन्य व्यक्ति की। फॉरेंसिक जांच के माध्यम से आवाज की पहचान, रिकॉर्डिंग का समय, स्थान और उसमें किसी प्रकार की एडिटिंग की जांच की जाएगी। यह भी पता लगाया जा रहा है कि यह केवल भड़काऊ बातचीत थी या इसके पीछे किसी वास्तविक हमले की योजना, संसाधन और सहयोगी नेटवर्क मौजूद था।
संदिग्ध व्हाट्सऐप चैनल भी जांच के दायरे में
पुलिस को आरोपी के मोबाइल में कई संदिग्ध व्हाट्सऐप चैनल और समूह मिलने की जानकारी सामने आई है। इनमें ‘राणा भाई ग्रुप’, ‘मेमन एंड जट्ट’ और दूसरे नामों वाले चैनल शामिल बताए जा रहे हैं।
इन चैनलों में हथियारबंद लोगों, कथित आतंकियों और भड़काऊ सामग्री की तस्वीरें मिलने का दावा किया गया है। पुलिस संबंधित समूहों के एडमिन, सदस्यों और उनकी लोकेशन का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
जांच एजेंसियां यह भी जानना चाहती हैं कि आरोपी केवल इन चैनलों का सदस्य था या वह इनके संचालन, सामग्री साझा करने अथवा नए युवाओं को जोड़ने में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा था।
हथियारों के साथ तस्वीरें मिलने का दावा
सुहेल के मोबाइल की गैलरी और सोशल मीडिया खातों से हथियारों के साथ उसकी कुछ कथित तस्वीरें मिलने की बात भी कही गई है।
इन तस्वीरों की प्रामाणिकता, स्थान और समय का पता लगाया जा रहा है। यह भी जांच की जा रही है कि तस्वीरों में दिख रहे हथियार असली थे, नकली थे या किसी अन्य व्यक्ति के थे।
जांच अधिकारी तस्वीरों के मेटाडेटा, मोबाइल लोकेशन और संबंधित सोशल मीडिया अपलोड की जानकारी के आधार पर आरोपी की पूर्व गतिविधियों का पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं।
पेंटर के रूप में कर रहा था काम
आरोपी हरिहर इलाके की एक फैक्ट्री में पेंटर का काम कर रहा था। वह लगभग दो सप्ताह पहले ही वहां पहुंचा था और पास के गांव में रह रहा था।
जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि उसका कर्नाटक पहुंचना रोजगार से जुड़ा सामान्य कदम था या उसने किसी विशेष उद्देश्य से हरिहर को अपना ठिकाना बनाया था। उसके साथ काम करने वाले मजदूरों, मकान मालिक, स्थानीय परिचितों और फैक्ट्री प्रबंधन से पूछताछ कर उसकी गतिविधियों और संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है।
पहले गिरफ्तार संदिग्धों से संबंध की जांच
कर्नाटक में इससे पहले भी संदिग्ध आतंकी गतिविधियों के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था। शुरुआती रिपोर्टों में सुहेल की गिरफ्तारी को उन्हीं मामलों से मिली जानकारी से जोड़ा गया था।
हालांकि कर्नाटक सरकार की ओर से कहा गया है कि अभी तक सुहेल और पहले गिरफ्तार किए गए संदिग्धों के बीच कोई निश्चित संबंध स्थापित नहीं हुआ है।
पुलिस सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है। डिजिटल साक्ष्य या संपर्कों के आधार पर संबंध सामने आने पर मामले का दायरा बढ़ाया जा सकता है।
सहारनपुर और शाहजहांपुर को लेकर भ्रम
आरोपी के मूल पते और उम्र को लेकर अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में भिन्न जानकारी सामने आई है। एफआईआर आधारित एक रिपोर्ट में उसे सहारनपुर के लखनौती क्षेत्र का 25 वर्षीय निवासी बताया गया है।
वहीं कुछ अन्य रिपोर्टों में आरोपी की उम्र 20 वर्ष और उसका मूल निवास शाहजहांपुर बताया गया है। एजेंसी रिपोर्टों में उसे सहारनपुर के गंगोह क्षेत्र से जोड़ा गया है। आधिकारिक पहचान दस्तावेज और पुलिस रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही आरोपी की उम्र एवं मूल पते की स्पष्ट पुष्टि हो सकेगी।
NIA और ATS की भूमिका पर अलग-अलग रिपोर्ट
कुछ मीडिया और समाचार एजेंसी रिपोर्टों में कहा गया है कि आरोपी को NIA और ATS की संयुक्त कार्रवाई में पकड़ा गया। इन रिपोर्टों के मुताबिक केंद्रीय एजेंसियों के खुफिया इनपुट के आधार पर कार्रवाई की गई।
दूसरी ओर एफआईआर से जुड़े विवरण में हरिहर ग्रामीण पुलिस द्वारा स्थानीय सूचना के आधार पर आरोपी को पकड़ने की बात सामने आई है। उसे आगे की जांच के लिए तुमकुरु पुलिस को सौंपे जाने की जानकारी भी दी गई है।
केंद्रीय एजेंसियां मामले की जांच और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण में शामिल हो सकती हैं, लेकिन उनकी सटीक भूमिका की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
ISI या पाकिस्तानी नेटवर्क से संबंध की जांच
मोबाइल में पाकिस्तानी कोड वाला नंबर मिलने के बाद जांच एजेंसियां आरोपी के सीमा पार संपर्कों की पड़ताल कर रही हैं।
यह पता लगाया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति किसी आतंकी संगठन, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी या कट्टरपंथी डिजिटल नेटवर्क से जुड़ा था या नहीं।
हालांकि इस स्तर पर आरोपी का ISI से संबंध साबित नहीं हुआ है। पाकिस्तानी नंबर मिलना जांच का महत्वपूर्ण आधार हो सकता है, लेकिन किसी संगठित नेटवर्क की पुष्टि विस्तृत तकनीकी और खुफिया जांच के बाद ही होगी।
सहारनपुर में भी संपर्कों की पड़ताल
एजेंसी रिपोर्टों के अनुसार उत्तर प्रदेश में आरोपी के संपर्कों, पारिवारिक पृष्ठभूमि और वित्तीय गतिविधियों की समानांतर जांच शुरू की गई है।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वह किन लोगों के संपर्क में था, उसकी ऑनलाइन गतिविधियां कब शुरू हुईं और क्या किसी स्थानीय व्यक्ति ने उसे कट्टरपंथी सामग्री अथवा विदेशी संपर्कों से जोड़ा था।
परिवार के सदस्यों और परिचितों से पूछताछ के जरिए उसकी गतिविधियों तथा व्यवहार में आए बदलावों के बारे में जानकारी ली जा सकती है।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
एफआईआर से संबंधित रिपोर्ट के अनुसार आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 113(3) और 197(1) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
ये प्रावधान आतंकी गतिविधि से जुड़ी साजिश, भारत की संप्रभुता एवं अखंडता को खतरा पहुंचाने और विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य पैदा करने जैसे गंभीर आरोपों से संबंधित हो सकते हैं।
जांच में ठोस साक्ष्य मिलने पर गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी UAPA या अन्य विशेष कानूनों की धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं। फिलहाल आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट होगी निर्णायक
इस मामले में मोबाइल फोन से मिलने वाली डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण होगी। इससे डिलीट किए गए संदेश, कॉल लॉग, सोशल मीडिया लॉगिन, इंटरनेट हिस्ट्री और लोकेशन डेटा की जानकारी सामने आ सकती है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाएंगी कि आरोपी ने किसी हमले के लिए विस्फोटक, हथियार, धन, स्थान या सहयोगियों की व्यवस्था की थी या नहीं।
सिर्फ भड़काऊ संदेश और वास्तविक आतंकी साजिश के बीच अंतर स्थापित करने के लिए ठोस तकनीकी, भौतिक तथा परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की आवश्यकता होगी।
राम मंदिर की सुरक्षा को लेकर सतर्कता
अयोध्या का श्रीराम मंदिर देश के सबसे संवेदनशील धार्मिक स्थलों में शामिल है। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू है।
ऐसे में मंदिर से जुड़ी किसी भी धमकी, संदिग्ध संदेश या ऑनलाइन गतिविधि को सुरक्षा एजेंसियां गंभीरता से लेती हैं। स्थानीय पुलिस, खुफिया इकाइयां और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां संभावित खतरों की लगातार समीक्षा करती हैं।
ताजा गिरफ्तारी के बाद आरोपी के नेटवर्क और उसके कथित इरादों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने तक यह मामला कथित साजिश और संदिग्ध डिजिटल गतिविधियों से संबंधित आरोपों के स्तर पर है।
निष्कर्ष
कर्नाटक के दावणगेरे से सुहेल की गिरफ्तारी के बाद अयोध्या राम मंदिर को निशाना बनाने की कथित साजिश का मामला सामने आया है।
फोन में पाकिस्तानी संपर्क, संदिग्ध ऑनलाइन समूह, हथियारों की तस्वीरें और मंदिर पर हमले से संबंधित कथित ऑडियो मिलने के दावों ने मामले को गंभीर बना दिया है।
हालांकि आरोपी के नेटवर्क, पाकिस्तानी या ISI संबंध, वास्तविक हमले की तैयारी और अन्य सहयोगियों की भूमिका की अंतिम पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस एवं सुरक्षा एजेंसियों की विस्तृत जांच और डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही साजिश की वास्तविक सीमा स्पष्ट होगी।
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