पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच ‘वीडियो पॉलिटिक्स’ ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। All India Trinamool Congress (TMC) द्वारा जारी एक विवादित वीडियो को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने इसे “झूठा प्रचार” बताते हुए कहा कि Bharatiya Janata Party (BJP) कभी भी ऐसे व्यक्ति से हाथ नहीं मिलाएगी जो बंगाल में ‘बाबरी मस्जिद’ बनाने की बात करता हो।
क्या है ₹1000 करोड़ का वीडियो विवाद?
दरअसल, 9 अप्रैल 2026 को TMC ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें उनके पूर्व विधायक हुमायूँ कबीर को कथित तौर पर BJP के साथ सांठगांठ की बात करते हुए दिखाया गया।
वीडियो के आधार पर आरोप लगाया गया कि BJP ने हुमायूँ कबीर को ₹1000 करोड़ का ऑफर दिया, ताकि राज्य में मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण किया जा सके। इस विवाद में दो मुख्यमंत्रियों के नाम भी उछाले जाने से सियासी हलचल और तेज हो गई।
#WATCH | Kolkata, West Bengal: On the viral video of AJUP founder Humayun Kabir, Union Home Minister Amit Shah says, "You may be unaware of Mamata Ji's capabilities; she is capable of producing 2000 such videos. Humayun Kabir and the BJP are like the South Pole and the North… pic.twitter.com/zgfSJbJeFy
— ANI (@ANI) April 10, 2026
अमित शाह का तीखा पलटवार
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमित शाह ने इस वीडियो को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “आप ममता जी की काबिलियत को नहीं जानते, वह ऐसे 2000 वीडियो बनवा सकती हैं।”
शाह ने यह भी कहा कि हुमायूँ कबीर और BJP का संबंध “उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव” जैसा है, जो कभी एक साथ नहीं आ सकते। उन्होंने साफ कहा कि पार्टी ऐसे किसी व्यक्ति से गठबंधन नहीं करेगी, भले ही उसे 20 साल विपक्ष में क्यों न बैठना पड़े।
हुमायूँ कबीर का दावा: AI से बना वीडियो
दूसरी ओर, वीडियो में नजर आ रहे हुमायूँ कबीर ने इसे पूरी तरह फर्जी करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया है और उनकी आवाज के साथ छेड़छाड़ की गई है।
कबीर ने TMC को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनके पास BJP के साथ किसी भी तरह की मीटिंग या समझौते का सबूत है, तो उसे सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि आरोप साबित न होने पर वे मानहानि का केस दर्ज कराएंगे।
चुनावी माहौल में बढ़ा तनाव
इस पूरे विवाद ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। चुनाव के ठीक पहले इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप से सियासी तापमान बढ़ गया है और यह मुद्दा आने वाले दिनों में चुनावी विमर्श का केंद्र बन सकता है।
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