भारत की समुद्री व्यापार व्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार एक बड़ा और अहम कदम उठाने जा रही है। शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SCI), कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CONCOR) और सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन मिलकर एक नई घरेलू कंटेनर शिपिंग कंपनी शुरू करने जा रही हैं, जिसका नाम ‘भारत कंटेनर लाइन’ होगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य देश की कंटेनर शिपिंग जरूरतों को घरेलू स्तर पर पूरा करना और विदेशी कंपनियों पर निर्भरता को कम करना है।
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस जॉइंट वेंचर में देश के तीन प्रमुख बंदरगाह प्राधिकरण भी शामिल होंगे। इनमें भारत का सबसे बड़ा कंटेनर पोर्ट जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA), चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी और वीओ चिदंबरनार पोर्ट अथॉरिटी शामिल हैं। इन सभी संस्थाओं के बीच आने वाले दिनों में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।
फिलहाल भारत अपने कंटेनर व्यापार के लिए बड़े पैमाने पर विदेशी शिपिंग कंपनियों पर निर्भर है। देश के कुल आयात-निर्यात कंटेनर कार्गो का केवल करीब 5 प्रतिशत ही भारतीय कंपनियों द्वारा ढोया जाता है। इसकी वजह से हर साल लगभग ₹6.87 लाख करोड़ की भारी रकम विदेशी शिपिंग कंपनियों को भाड़े के रूप में चुकानी पड़ती है। भारत कंटेनर लाइन की शुरुआत से इस आर्थिक निर्भरता को कम करने की दिशा में ठोस कदम माना जा रहा है।
भारत हर साल कंटेनर माल ढुलाई के लिए विदेशी कंपनियों को करीब ₹6 लाख करोड़ का भुगतान करता है, जो लगभग देश के रक्षा बजट के बराबर है। इस अहम तथ्य को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पिछले वर्ष गुजरात के भावनगर में आयोजित ‘समुद्र से समृद्धि’ कार्यक्रम के दौरान रेखांकित किया था। यही कारण है कि सरकार अब समुद्री व्यापार में आत्मनिर्भर बनने पर विशेष जोर दे रही है।
भारत कंटेनर लाइन के प्रस्तावित हिस्सेदारी ढांचे के तहत SCI और CONCOR, दोनों नवरत्न कंपनियाँ, इसमें 30-30 प्रतिशत हिस्सेदारी रखेंगी। वहीं सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन के पास 20 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। इसके अलावा जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी को 10 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा, जबकि चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी और वीओ चिदंबरनार पोर्ट अथॉरिटी मिलकर शेष 10 प्रतिशत हिस्सेदारी साझा करेंगी।
इस नई कंपनी की सबसे बड़ी ताकत CONCOR का मजबूत और व्यापक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क माना जा रहा है। CONCOR के पास देशभर में 66 टर्मिनल, करीब 410 कंटेनर ट्रेनें, 56 हजार से अधिक ISO कंटेनर और लगभग 40 लाख वर्ग फुट का वेयरहाउसिंग स्पेस मौजूद है। इसी मजबूत आधार के जरिए भारत कंटेनर लाइन को जमीन से समुद्र तक तेजी से स्थापित करने में मदद मिलेगी।
भारत कंटेनर लाइन की शुरुआत से तटीय शिपिंग को बढ़ावा मिलेगा, साझेदार बंदरगाहों पर कार्गो की आवाजाही में इजाफा होगा और वैश्विक कंटेनर व्यापार में भारत की स्थिति और मजबूत होगी। यह पूरी पहल आत्मनिर्भर भारत के विजन के अनुरूप है, जिसका मकसद देश की व्यापारिक जरूरतों को अपने संसाधनों और क्षमताओं के जरिए पूरा करना है।
वर्तमान में कंटेनर शिपिंग सेक्टर पर दुनिया की बड़ी विदेशी कंपनियों जैसे मर्स्क (Maersk), MSC, एवरग्रीन, वान हाई और CMA CGM का दबदबा है। भारत कंटेनर लाइन के जरिए सरकार इस निर्भरता को कम करने और वैश्विक समुद्री व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में निर्णायक कदम उठा रही है।
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