उपराष्ट्रपति चुनाव के नतीजे एनडीए के पक्ष में स्पष्ट रूप से झुके और इस जीत ने विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ को बड़ा झटका दिया। चुनाव परिणामों में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ‘इंडिया’ गठबंधन के 10 से अधिक सांसदों के वोट अमान्य घोषित कर दिए गए। सूत्रों के मुताबिक, आम आदमी पार्टी (AAP) के 3 सांसद, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के 2 सांसद, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के 1 सांसद और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के 2 सांसदों के वोट अमान्य पाए गए। इसके अलावा कुछ अन्य सांसदों ने भी मतदान प्रक्रिया में गलती की, जिससे उनके वोट गिने नहीं जा सके। माना जा रहा है कि इन सांसदों ने गठबंधन के उम्मीदवार को वोट देते समय तकनीकी गलती की, जिसके चलते विपक्ष के कुल मतों में कमी आ गई और एनडीए को अप्रत्याशित बढ़त हासिल हो गई।
नतीजों में एनडीए के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने विपक्ष के बी. सुदर्शन रेड्डी को 152 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया। राधाकृष्णन को कुल 452 वोट मिले, जबकि रेड्डी को सिर्फ 300 वोट हासिल हुए। संसद की मौजूदा संख्या बल को देखें तो एनडीए के पास 427 और ‘इंडिया’ ब्लॉक के पास 315 मत थे, लेकिन मतदान के समय विपक्षी खेमे में पड़ी गड़बड़ी और अमान्य वोटों ने समीकरण पूरी तरह बदल दिए। इस अप्रत्याशित हार से विपक्षी गठबंधन की एकता और रणनीति पर भी सवाल उठने लगे हैं।
जीत के बाद सीपी राधाकृष्णन ने इस परिणाम को “राष्ट्रवादी विचारधारा की जीत” करार दिया और कहा कि यह जीत केवल एनडीए की नहीं, बल्कि पूरे भारत के लोगों की है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य सबके सहयोग से ही संभव है। राधाकृष्णन ने कहा कि विपक्ष ने इस चुनाव को वैचारिक लड़ाई बताया था, लेकिन जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों ने मतदान के जरिए यह स्पष्ट कर दिया कि राष्ट्रवादी विचारधारा और विकास का एजेंडा ही आगे का रास्ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों का योगदान बेहद महत्वपूर्ण होता है। ये एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और लोकतंत्र की मजबूती इसी संतुलन से बनी रहती है। उपराष्ट्रपति पद की अपनी नई भूमिका को लेकर राधाकृष्णन ने कहा कि वे अपनी सीमाओं और दायित्वों को समझते हैं और उसी के भीतर रहते हुए राष्ट्रहित में काम करेंगे। उन्होंने विकास और जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का वादा किया। उनकी इस जीत ने न केवल एनडीए को मजबूती दी है, बल्कि विपक्षी खेमे की आंतरिक चुनौतियों को भी उजागर कर दिया है।
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