उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने दशकों से पुनर्वास का इंतजार कर रहे पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से आए विस्थापित हिंदू बंगाली परिवारों के लिए एक ऐतिहासिक और मानवीय फैसला लिया है। गुरुवार, 29 जनवरी 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेरठ में रह रहे 99 परिवारों को कानपुर देहात में पुनर्वासित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इस निर्णय से इन परिवारों को न सिर्फ स्थायी घर मिलेगा, बल्कि वे सम्मान और सुरक्षा के साथ अपना जीवन बिता सकेंगे।
फिलहाल ये 99 हिंदू बंगाली परिवार मेरठ जिले की मवाना तहसील के नगला गुसाईं गांव में रह रहे थे। वे झील के किनारे ऐसी जमीन पर बसे थे, जो तकनीकी रूप से अवैध मानी जाती थी और पर्यावरण की दृष्टि से भी संवेदनशील थी। लंबे समय से अस्थायी और असुरक्षित हालात में रह रहे इन परिवारों के लिए सरकार ने अब एक स्थायी और व्यवस्थित समाधान निकाला है।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी की अध्यक्षता में संपन्न कैबिनेट की बैठक में पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) से विस्थापित हिन्दू बंगाली परिवारों के पुनर्वासन के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई है। pic.twitter.com/JHYIMq0i5N
— Government of UP (@UPGovt) January 29, 2026
सरकार ने इन परिवारों को कानपुर देहात की रसूलाबाद तहसील में बसाने का फैसला किया है। पुनर्वास योजना के तहत इन्हें दो अलग-अलग गांवों में भूमि आवंटित की जाएगी। भैंसा गांव में 50 परिवारों को करीब 27.5 एकड़ जमीन पर बसाया जाएगा, जबकि ताजपुर तरसौली गांव में शेष 49 परिवारों के लिए लगभग 26 एकड़ जमीन निर्धारित की गई है। इस तरह कुल 99 परिवारों के पुनर्वास के लिए पुनर्वास विभाग की भूमि का उपयोग किया जाएगा।
सरकारी योजना के अनुसार, प्रत्येक विस्थापित परिवार को 0.50 एकड़ (आधा एकड़) जमीन दी जाएगी। यह भूमि 30 साल की लीज पर आवंटित की जाएगी, जिसे आगे दो बार और नवीनीकरण किया जा सकेगा। यानी ये परिवार अधिकतम 90 वर्षों तक इस जमीन पर रहकर अपना घर-परिवार और भविष्य संवार सकेंगे।
योगी सरकार का यह फैसला विस्थापित हिंदू बंगाली परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ने, उन्हें सामाजिक सुरक्षा, स्थायित्व और सम्मानजनक जीवन देने की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। दशकों बाद इन परिवारों को मिली यह राहत न केवल उनके जीवन में स्थिरता लाएगी, बल्कि सरकार की समावेशी और संवेदनशील नीति को भी दर्शाती है।
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