पश्चिम बंगाल की कालीगंज विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर सियासी माहौल गरमाया हुआ है। तीनों प्रमुख दल—भाजपा, कांग्रेस-वाम गठबंधन और तृणमूल कांग्रेस (TMC)—इस चुनाव को प्रतिष्ठा का विषय बना चुके हैं। आइए एक नज़र डालते हैं कालीगंज उपचुनाव के पूरे परिदृश्य पर:
कालीगंज उपचुनाव 2025: उम्मीदवारों की सूची
| पार्टी | उम्मीदवार | विशेषता |
|---|---|---|
| भाजपा (BJP) | आशीष घोष | पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी से घोषित; स्थानीय कार्यकर्ताओं में सक्रिय। |
| कांग्रेस | काबिल उद्दीन शेख | कांग्रेस और वाम मोर्चा के संयुक्त उम्मीदवार। |
| टीएमसी (TMC) | अलीफा अहमद | दिवंगत पूर्व विधायक नसीरुद्दीन अहमद की बेटी; सहानुभूति और पारिवारिक पकड़ को भुनाने की कोशिश। |
चुनाव कार्यक्रम
- मतदान तिथि: 19 जून 2025
- मतगणना तिथि: 23 जून 2025
- उपचुनाव वाले राज्यों की कुल सीटें: 5 (देश भर में)
- राज्य: पश्चिम बंगाल
- जिला: नादिया
- विधानसभा क्षेत्र: कालीगंज
राजनीतिक समीकरण और पृष्ठभूमि
- कालीगंज सीट कांग्रेस का पारंपरिक गढ़ मानी जाती रही है, लेकिन बीते वर्षों में भाजपा और टीएमसी ने भी यहां प्रभाव बढ़ाया है।
- 2024 लोकसभा चुनाव में वाम मोर्चा ने इस क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन किया था। इसी आधार पर सीपीएम भी यहां से दावेदारी चाहती थी, लेकिन अंततः वाम और कांग्रेस में समझौता हुआ और कांग्रेस को टिकट मिला।
- टीएमसी उम्मीदवार अलीफा अहमद, अपने पिता व पूर्व विधायक नसीरुद्दीन अहमद की असामयिक मृत्यु के बाद सहानुभूति लहर का लाभ ले सकती हैं। उनका चेहरा युवा और महिला प्रतिनिधित्व का प्रतीक बन सकता है।
- भाजपा उम्मीदवार आशीष घोष के चयन से पार्टी ने संकेत दिया है कि वह यहां स्थानीय चेहरा और विकास की राजनीति पर फोकस करेगी, बजाय बाहरी प्रभाव के।
प्रमुख राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
- माकपा के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा:
“हमने लोकसभा में अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन गठबंधन धर्म निभाते हुए हमने कांग्रेस के पक्ष में यह सीट छोड़ी है।”
- टीएमसी की रणनीति पूरी तरह अलीफा अहमद के जरिए परिवारवाद, सहानुभूति और विकास के एजेंडे पर टिकी है।
- भाजपा इस उपचुनाव को “मोदी सरकार के 11 साल के कामकाज के जनादेश” के तौर पर देखने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषण और संभावित मुकाबला
- यह उपचुनाव तीर, हाथ और कमल के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है।
- वोट कटाव की संभावना कांग्रेस-वाम और TMC के बीच अधिक हो सकती है, जिससे भाजपा को फायदा मिल सकता है, जैसा कि कुछ पूर्व उपचुनावों में देखा गया है।
- लेकिन सहानुभूति लहर और मुस्लिम बहुल इलाका होने के कारण TMC को भी मजबूत समर्थन मिल सकता है।