बांग्लादेश के प्रमुख नेता और इंकलाब मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के मामले में पड़ोसी देश ने भारत पर आरोप लगाने शुरू कर दिए हैं। बांग्लादेश पुलिस ने दावा किया था कि हादी की हत्या में शामिल आरोपी भारत भाग गए हैं। अब इस दावे पर भारत की सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने कड़ा जवाब दिया है और इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
बीएसएफ ने साफ कहा है कि भारत–बांग्लादेश सीमा पर किसी भी तरह की अवैध आवाजाही नहीं हुई है। बीएसएफ की मेघालय, त्रिपुरा और असम रीजन की यूनिट्स ने बांग्लादेश के आंतरिक सुरक्षा विभाग के दावों को नकारते हुए कहा कि सीमा पर न तो किसी घुसपैठ की जानकारी है और न ही किसी संदिग्ध की गिरफ्तारी या रोक-टोक हुई है।
दरअसल, बांग्लादेश पुलिस ने एक बयान जारी कर भारतीय सीमा पर तैनात सुरक्षाबलों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। इसके जवाब में बीएसएफ ने इन रिपोर्टों को झूठा, मनगढ़ंत और भ्रामक बताया है। बीएसएफ का कहना है कि बांग्लादेश बिना किसी ठोस सबूत के भारत पर आरोप लगा रहा है।
BSF dismisses Bangladeshi media claims on Osman Hadi killing as ‘false, fabricated’ – 'No such cross-border movement'https://t.co/3Ln5za8oaf
— Mint (@livemint) December 29, 2025
बीएसएफ सूत्रों के मुताबिक, बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड (BGB) की ओर से भी ऐसी किसी घटना की कोई सूचना नहीं दी गई है। बीएसएफ ने यह भी कहा कि बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर सीसीटीवी कैमरे और चेकपॉइंट मौजूद हैं, ऐसे में आरोपियों के बिना किसी रिकॉर्ड के सीमा पार निकल जाने के दावे बेहद अविश्वसनीय हैं।
बांग्लादेशी मीडिया में यह आरोप लगाया गया था कि आरोपी फैसल करीम मसूद और आलमगीर शेख हलुआघाट सीमा के रास्ते भारत में दाखिल हुए। हालांकि, बीएसएफ ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि इस तरह के किसी भी घुसपैठ का कोई प्रमाण मौजूद नहीं है।
गौरतलब है कि शरीफ उस्मान हादी को 12 दिसंबर को गोली मारी गई थी। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें एयरलिफ्ट कर सिंगापुर ले जाया गया था, जहां 18 दिसंबर को उनकी मौत हो गई।
32 वर्षीय उस्मान बिन हादी ढाका विश्वविद्यालय में पॉलिटिकल साइंस विभाग के छात्र थे। उनका जन्म झलकाठी जिले में हुआ था और उनके पिता एक मदरसा शिक्षक थे। हादी की प्रारंभिक और उच्च शिक्षा नेसराबाद कामिल मदरसे से हुई थी। वे एक लेखक भी थे और उन्होंने कई किताबें लिखी थीं।
हादी जुलाई प्रोटेस्ट के बाद चर्चा में आए थे। उन्होंने बांग्लादेशी सेना और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई थी। उनकी हत्या के बाद बांग्लादेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और अब यह मामला अंतरराष्ट्रीय आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया है।
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