दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल टेक्नोलॉजी के तेजी से बढ़ते उपयोग के बीच भारत सरकार ने बजट 2026-27 में IT, AI और डेटा सेंटर सेक्टर को बड़ा प्रोत्साहन दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने डेटा सेंटर्स और क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए 2047 तक टैक्स हॉलिडे की घोषणा कर देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम उठाया है। इस फैसले का उद्देश्य भारत को एक ग्लोबल AI और डेटा हब के रूप में स्थापित करना है।
बजट में घोषित इस नीति के तहत जो विदेशी कंपनियां भारत में डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाकर वैश्विक ग्राहकों को क्लाउड सर्विस देंगी, उन्हें टैक्स में छूट मिलेगी। हालांकि, भारतीय ग्राहकों को सेवाएं एक भारतीय रीसेलर एंटिटी के जरिए देनी होंगी। साथ ही, अगर कोई रिलेटेड एंटिटी भारत से डेटा सेंटर सर्विस देती है, तो उसे लागत पर 15% का सेफ हार्बर भी दिया जाएगा। यह कदम डेटा लोकलाइजेशन, क्लाउड इन्वेस्टमेंट और AI इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को बढ़ावा देगा।
एनारॉक की रिपोर्ट के मुताबिक भारत का डेटा सेंटर बाजार फिलहाल करीब $10 बिलियन (लगभग ₹91,500 करोड़) का है और FY24 में इससे लगभग $1.2 बिलियन का रेवेन्यू हुआ। वहीं रियल एस्टेट फर्म JLL का अनुमान है कि 2027 तक भारत में 795 मेगावॉट नई डेटा सेंटर कैपेसिटी जुड़ सकती है, जिससे कुल क्षमता 1.8 गीगावॉट हो जाएगी। केंद्रीय IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी कहा है कि भारत के AI इंफ्रास्ट्रक्चर में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट FY26 के अंत तक दोगुना हो सकता है।
पिछले कुछ समय में कई दिग्गज कंपनियों ने भारत में बड़े निवेश की घोषणा की है। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने $6.5 बिलियन (₹54,000 करोड़), गूगल ने अडानी ग्रुप के साथ $15 बिलियन, माइक्रोसॉफ्ट ने $17.5 बिलियन और अमेजन ने अगले पांच वर्षों में $35 बिलियन निवेश का ऐलान किया है। इन निवेशों का बड़ा हिस्सा AI-रेडी डेटा सेंटर्स और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित है।
AI और डेटा सेंटर्स के विकास के लिए कंप्यूटिंग पावर के साथ-साथ रेयर अर्थ मेटल्स की भी अहम भूमिका है। इसे ध्यान में रखते हुए बजट 2026 में डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे चीन पर भारत की निर्भरता कम होगी। स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन, डिफेंस और फाइटर जेट्स तक में रेयर अर्थ मेटल्स की जरूरत होती है।
भारत दुनिया का लगभग 20% डेटा पैदा करता है, लेकिन उसके पास वैश्विक डेटा सेंटर क्षमता का केवल 3% हिस्सा है। ई-कॉमर्स, डिजिटल पेमेंट, OTT, ऑनलाइन गेमिंग और AI एप्लिकेशंस के बढ़ते उपयोग को देखते हुए देश में हाई-स्पीड डेटा स्टोरेज और क्लाउड सर्विस की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में बजट 2026 में IT और AI सेक्टर को मिला यह बूस्ट न सिर्फ आर्थिक विकास बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, डेटा संप्रभुता और डिजिटल आत्मनिर्भरता के लिहाज से भी बेहद जरूरी माना जा रहा है।
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