राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच हाल ही में दिल्ली में हुई मुलाकात को भारत-चीन संबंधों में एक अहम कदम माना जा रहा है। यह बैठक सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधियों की 24वीं वार्ता का हिस्सा थी, जिसमें दोनों पक्षों ने न केवल सीमा विवाद बल्कि द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा की। डोभाल ने चर्चा के दौरान यह रेखांकित किया कि सीमा पर शांति और सौहार्द बनाए रखना दोनों देशों के लिए अनिवार्य है और यही द्विपक्षीय रिश्तों में “नई ऊर्जा और गति” लाने की कुंजी है। उन्होंने कहा कि सीमा क्षेत्र फिलहाल शांतिपूर्ण है और आपसी संवाद के जरिए संबंध अब अधिक प्रगाढ़ हो रहे हैं।
चीन की ओर से वांग यी ने भी इस सकारात्मक माहौल को स्वीकारते हुए कहा कि कजान में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात ने आपसी विश्वास को बढ़ाने और सीमा विवाद को संतुलित तरीके से सुलझाने के लिए नई दिशा प्रदान की है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि साल की शुरुआत से भारत-चीन संबंध स्थिरता की ओर बढ़े हैं और सीमा पर हालात लगातार सुधर रहे हैं।
#WATCH | दिल्ली: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोवल ने हैदराबाद हाउस में चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। #WATCH #Delhi #AjitDoval #WangYi #HyderabadHouse
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— One India News (@oneindianewscom) August 19, 2025
बैठक में यह सहमति बनी कि सीमा क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए सीमा प्रबंधन और नियंत्रण को और मजबूत किया जाएगा। इसके साथ ही, अगले वर्ष चीन में 25वीं विशेष प्रतिनिधियों की बैठक आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया। दोनों पक्षों ने न केवल सीमा विवाद पर बल्कि साझा अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों—जैसे वैश्विक आर्थिक चुनौतियां, भू-राजनीतिक अस्थिरता और जलवायु संकट—पर भी विचार-विमर्श किया।
डोभाल ने कहा कि कजान में हुई उच्च स्तरीय वार्ता भारत-चीन संबंधों में सुधार और विकास का “टर्निंग पॉइंट” साबित हुई है। उन्होंने माना कि मौजूदा वैश्विक अशांति और अनिश्चितताओं के बीच भारत और चीन के सामने कई साझा चुनौतियां हैं, जिन्हें पार करने के लिए आपसी विश्वास और सहयोग बढ़ाना जरूरी है।
इस बैठक की खास अहमियत इसलिए भी रही क्योंकि डोभाल ने यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा की आधिकारिक पुष्टि की। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री 31 अगस्त और 1 सितंबर 2025 को तियानजिन में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इसे भारत-चीन संबंधों को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वांग यी की यह यात्रा और डोभाल-वांग वार्ता दोनों देशों के बीच 2020 की गलवान झड़प के बाद आई खाई को पाटने के प्रयासों का हिस्सा है। हाल के महीनों में दोनों पक्षों ने संबंध बहाली की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं, जैसे कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली और भारत द्वारा चीनी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा जारी करना। इन पहलों के जरिए स्पष्ट संदेश है कि दोनों पड़ोसी देश अतीत के तनाव से आगे बढ़कर भविष्य में सहयोग और स्थिरता को प्राथमिकता देना चाहते हैं।
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