कर्नाटक की कांग्रेस सरकार में एक बार फिर अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। पार्टी के करीब 40 विधायकों ने मंत्रिमंडल में फेरबदल की मांग उठाई है, जिनमें से 30 विधायक रविवार (12 अप्रैल 2026) को दिल्ली पहुंच गए।
सूत्रों के मुताबिक, ये विधायक आने वाले दिनों में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, महासचिव केसी वेणुगोपाल, कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला और संभवतः राहुल गांधी से मुलाकात कर सकते हैं।
विधायकों की मुख्य मांग है कि मुख्यमंत्री सिद्दारमैया पर दबाव बनाया जाए ताकि जल्द से जल्द कैबिनेट में बदलाव किया जा सके। उनका कहना है कि कई वरिष्ठ विधायक अभी तक मंत्री नहीं बन पाए हैं, इसलिए नए चेहरों को मौका देने के लिए फेरबदल जरूरी है।
* ನರಸಿಂಹರಾಜಪುರದಲ್ಲಿ ಸೇತುವೆ ನಿರ್ಮಾಣ ಬಹುದಿನದ ಬೇಡಿಕೆಯಾಗಿತ್ತು. ಈಗ ನನ್ನ ಅಧಿಕಾರಾವಧಿಯಲ್ಲಿಯೇ ಶಂಕುಸ್ಥಾಪನೆ ಮತ್ತು ಉದ್ಘಾಟನೆಯಾಗುತ್ತಿರುವುದು ಸಂತಸ ತಂದಿದೆ. ಬಿಜೆಪಿಯವರ ಅವಧಿಯಲ್ಲಿ ಸೇತುವೆ ನಿರ್ಮಾಣಕ್ಕೆ ಯಾವುದೇ ಕ್ರಮವಾಗಿರಲಿಲ್ಲ.
* ಸಚಿವ ಸ್ಥಾನದ ಆಕಾಂಕ್ಷಿ ಶಾಸಕರು ನವದೆಹಲಿಗೆ ಭೇಟಿ ನೀಡುವುದರಲ್ಲಿ ಯಾವುದೇ ತಪ್ಪಿಲ್ಲ.…
— Siddaramaiah (@siddaramaiah) April 12, 2026
इस बीच मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विधायकों का दिल्ली जाना कोई गलत बात नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा कि मंत्री पद के इच्छुक लोगों का दिल्ली जाना स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी बताया कि पांच राज्यों में चुनाव और बजट सत्र के कारण कैबिनेट विस्तार में देरी हुई है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के लगभग तीन साल पूरे होने वाले हैं। फिलहाल मंत्रिमंडल में दो पद पहले से ही खाली हैं, क्योंकि केएन राजन्ना और बी नागेंद्र इस्तीफा दे चुके हैं।
विधायकों का यह भी आरोप है कि कई मौजूदा मंत्री एक से अधिक बार अलग-अलग विभाग संभाल चुके हैं, जिससे 2023 के विधानसभा चुनाव में जीत के बावजूद कई नेताओं को अवसर नहीं मिल पाया। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि कैबिनेट फेरबदल के तहत 25 पद खाली करने की मांग की जा सकती है।
राज्य कांग्रेस के भीतर यह विवाद गुटबाजी को भी उजागर करता है, खासकर मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के खेमों के बीच। माना जा रहा है कि सिद्दारमैया समर्थक फेरबदल के पक्ष में हैं, जबकि कुछ नेता इससे सहमत नहीं हैं, खासकर नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच।
अब इस पूरे मुद्दे पर अंतिम फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा, जिससे आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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