महाराष्ट्र के नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने भारत की वैश्विक भूमिका और उसकी आध्यात्मिक ताकत पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जब भी दुनिया किसी बड़े संकट में फँसती है, तब भारत ही वह शक्ति बनकर उभरता है जो उसे उस खतरे से बाहर निकालने में सक्षम होता है।
भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि मानवीय अस्तित्व का सच्चा दृष्टिकोण भारत की प्राचीन आध्यात्मिक ज्ञान-परंपरा में निहित है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यही आध्यात्मिकता भारत को अन्य देशों से अलग बनाती है और उसे संकटों के समय स्थिर बनाए रखती है।
#WATCH | Nagpur, Maharashtra: RSS chief Mohan Bhagwat says, "…Whenever the world finds itself ensnared in crises, our nation emerges as the very entity that guides it out of that peril. The true perspective on human existence is enshrined within this spiritual wisdom of… pic.twitter.com/biBVqrxxci
— ANI (@ANI) April 13, 2026
उन्होंने आगे कहा कि जब दुनिया में भौतिकवाद, संकीर्णतावाद और उपभोक्तावाद जैसी विचारधाराओं के तूफान आते हैं—जो कई समाजों को प्रभावित और अस्थिर कर देते हैं—तब ये लहरें भारत को केवल छूकर निकल जाती हैं। भारत अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों के कारण अडिग और स्थिर बना रहता है।
आरएसएस प्रमुख ने संत परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की यह शक्ति उसके संतों और उनके ज्ञान का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह संतों का देश पर एक ऋण है, जिसके लिए हर भारतीय को आभारी होना चाहिए।
भागवत ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि संतों की शिक्षाओं को केवल सुनना ही नहीं, बल्कि उन्हें अपने दैनिक जीवन में अपनाना भी जरूरी है। यही भारत की वास्तविक ताकत है, जो उसे वैश्विक मंच पर एक अलग पहचान देती है।
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