गुजरात के वडोदरा में पूर्व भारतीय क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद यूसुफ पठान से जुड़ा जमीन विवाद एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। वडोदरा महानगरपालिका (VMC) की स्टैंडिंग कमेटी की हालिया बैठक में यूसुफ पठान के कब्जे वाले 978 वर्ग मीटर के प्लॉट समेत कुल सात प्लॉटों की नीलामी का प्रस्ताव रखा गया है। समिति ने इस प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए इसे अंतिम निर्णय के लिए जनरल बोर्ड बैठक में भेज दिया है।
नगर निगम की इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है। एक ओर जहां निगम इस जमीन को वापस लेकर नीलाम करने की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय संगठनों ने इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
2012 से शुरू हुआ था पूरा विवाद
जानकारी के अनुसार इस विवाद की शुरुआत वर्ष 2012 में हुई थी, जब यूसुफ पठान ने वडोदरा के तांदलजा क्षेत्र में स्थित सरकारी प्लॉट को प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था। उस समय नगर निगम ने उनकी मांग को स्वीकार कर लिया था, लेकिन राज्य सरकार की ओर से इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी नहीं मिल सकी।
आरोप है कि राज्य सरकार की मंजूरी न मिलने के बावजूद संबंधित जमीन पर दीवार और पशुओं के लिए शेड बनाकर कब्जा कर लिया गया। इसके बाद वडोदरा महानगरपालिका ने नोटिस जारी कर मामले में कार्रवाई शुरू की थी।
गुजरात हाई कोर्ट ने अपनाया था सख्त रुख
जमीन विवाद को लेकर मामला गुजरात हाई कोर्ट तक पहुंचा था। यूसुफ पठान ने नगर निगम के नोटिस को चुनौती दी थी, लेकिन कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए प्लॉट खाली करने के निर्देश दिए थे।
हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि जमीन खाली करने में जितनी अधिक देरी होगी, उतना अधिक आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। हालांकि, अदालत की ओर से कोई स्थगन आदेश (Stay Order) नहीं दिया गया था, इसके बावजूद नगर निगम अब तक जमीन को अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाया है।
नीलामी के फैसले का स्थानीय स्तर पर विरोध
वडोदरा महानगरपालिका द्वारा प्लॉट की नीलामी का प्रस्ताव सामने आने के बाद स्थानीय सामाजिक संगठन ‘विश्वामित्री बचाओ समिति’ ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। समिति ने वडोदरा के मेयर और नगर आयुक्त को लिखित शिकायत सौंपते हुए नीलामी प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है।
समिति का कहना है कि नगर निगम के नियमों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति द्वारा वर्षों तक सरकारी जमीन का गैर-कानूनी उपयोग किया गया है, तो उससे पहले जुर्माना और बकाया राशि वसूल की जानी चाहिए। संगठन का दावा है कि वर्ष 2012 से 2026 तक 14 वर्षों के कथित गैर-कानूनी उपयोग के लिए ब्याज सहित लगभग 7.50 करोड़ रुपये की राशि वसूल की जानी चाहिए।
₹7.50 करोड़ की वसूली के बिना नीलामी पर सवाल
विश्वामित्री बचाओ समिति का आरोप है कि यदि बिना जुर्माना वसूले सीधे बाजार मूल्य पर प्लॉट की नीलामी कर दी जाती है तो इससे नगर निगम को आर्थिक नुकसान होगा और कथित अतिक्रमणकर्ता को अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
समिति ने मांग की है कि जब तक गुजरात हाई कोर्ट में मामले का अंतिम निपटारा नहीं हो जाता और बकाया जुर्माना वसूल नहीं लिया जाता, तब तक प्लॉट की नीलामी प्रक्रिया पर रोक लगाई जानी चाहिए।
अब जनरल बोर्ड की बैठक पर टिकी निगाहें
स्टैंडिंग कमेटी से मंजूरी मिलने के बाद अब यह प्रस्ताव वडोदरा महानगरपालिका की जनरल बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। इस बैठक में प्लॉट की नीलामी को लेकर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।
इस पूरे मामले पर राजनीतिक हलकों, स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में निगम की अगली कार्रवाई और हाई कोर्ट में चल रही कानूनी प्रक्रिया इस विवाद की दिशा तय करेगी।
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