उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की मौत के मामले में अब नया मोड़ सामने आया है। पुलिस की विस्तृत जाँच के बाद यह स्पष्ट किया गया है कि यह घटना किसी नस्लीय हिंसा या हेट क्राइम से जुड़ी नहीं थी। पुलिस के अनुसार, पूरा विवाद एक जन्मदिन पार्टी के दौरान हुआ था, जहाँ मौजूद सभी लोग पर्वतीय क्षेत्रों से ताल्लुक रखते थे।
एंजेल चकमा की मौत के बाद उनके परिवार और पूर्वोत्तर के कई संगठनों ने इसे नस्लीय हिंसा और हेट क्राइम करार दिया था। हालाँकि, पुलिस ने जाँच के आधार पर इन आरोपों को खारिज कर दिया है। पुलिस का कहना है कि यह घटना नशे की हालत में हुए आपसी विवाद का नतीजा थी, न कि किसी पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा।
देहरादून में अंजेल चकमा हत्याकांड: नस्लवाद का दावा या आपसी झड़पा?
देहरादून में 9 दिसंबर को त्रिपुरा के 24 वर्षीय छात्र अंजेल चकमा पर हमला हुआ। 26 दिसंबर को उनकी मौत हो गई।
शुरुआत में इसे नस्लीय हिंसा बताया गया और सोशल मीडिया पर "चीनी-चिंकी" जैसे शब्दों का हवाला देकर इसे… pic.twitter.com/CQMZUZlwTH
— One India News (@oneindianewscom) December 30, 2025
पुलिस के मुताबिक, 9 दिसंबर 2025 को मणिपुर निवासी सूरज ख्वास ने अपने बेटे के जन्मदिन की पार्टी का आयोजन किया था। इस पार्टी में कई लोग शामिल थे और शुरुआत में माहौल पूरी तरह सामान्य और हँसी-मजाक भरा था। इसी दौरान एंजेल चकमा और उनके भाई माइकल चकमा को यह गलतफहमी हुई कि कुछ लोग उन पर टिप्पणी कर हँस रहे हैं।
इसी गलतफहमी के चलते पार्टी में कहासुनी शुरू हुई, जो धीरे-धीरे हिंसक झड़प में बदल गई। इस दौरान एंजेल चकमा और उनके भाई को गंभीर चोटें आईं। दोनों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ एंजेल की हालत लगातार गंभीर बनी रही।
पुलिस ने बताया कि जन्मदिन पार्टी आयोजित करने वाला सूरज ख्वास मणिपुर का रहने वाला है, जबकि मुख्य हमलावरों में एक नाबालिग और एक अन्य आरोपित नेपाल के निवासी हैं। इसके अलावा, दो अन्य आरोपित उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों से संबंध रखते हैं। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपित और पार्टी में मौजूद लोग पर्वतीय क्षेत्रों से हैं, ऐसे में नस्लीय टिप्पणी के आधार पर हिंसा होने की संभावना नहीं बनती।
इसी आधार पर पुलिस ने दावा किया है कि यह मामला नस्लीय हिंसा का नहीं है। यह निष्कर्ष आसपास मौजूद लोगों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर निकाला गया है। पुलिस ने नस्लीय भेदभाव की थ्योरी को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
इस बीच, एंजेल चकमा की पोस्टमार्टम और मेडिकल रिपोर्ट भी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, छात्र की मौत का कारण दिमाग में ब्लीडिंग बताया गया है। जन्मदिन पार्टी के बाद हुई हिंसा में एंजेल को सिर पर गंभीर चोटें आई थीं। उनका करीब 14 दिन तक अस्पताल में इलाज चला, लेकिन अंततः दिमाग की नस फटने से उनकी मौत हो गई।
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