बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की अध्यक्ष खालिदा जिया का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 80 वर्ष की थीं। बीएनपी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट साझा कर उनके निधन की पुष्टि की। उनके निधन की खबर से बांग्लादेश की राजनीति और आम जनता में शोक की लहर दौड़ गई है।
खालिदा जिया लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं। उन्हें लिवर सिरोसिस, डायबिटीज, गठिया, हृदय और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर समस्याएँ थीं। नवंबर महीने से वे ढाका के एवरकेयर अस्पताल में भर्ती थीं और वेंटिलेटर सपोर्ट पर थीं। 29-30 दिसंबर की रात उनकी हालत अचानक बिगड़ गई। विदेश में इलाज के लिए कतर से एक विशेष विमान भी मंगाया गया था, लेकिन मेडिकल बोर्ड ने उड़ान की अनुमति नहीं दी।
The BNP Chairperson and former Prime Minister, Begum Khaleda Zia, passed away today at 6:00 a.m., shortly after the Fajr prayer. Inna lillahi wa inna ilayhi raji‘un. We pray for the forgiveness of her soul and request everyone to offer prayers for her departed soul. pic.twitter.com/KY2948UPD5
— Bangladesh Nationalist Party-BNP (@bdbnp78) December 30, 2025
बीएनपी की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया, “बीएनपी चेयरपर्सन और पूर्व प्रधानमंत्री, राष्ट्रीय नेता बेगम खालिदा जिया आज सुबह फज्र की नमाज के तुरंत बाद सुबह 6 बजे इंतकाल कर गईं।” बयान के अनुसार, उनके निधन के समय परिवार के सदस्य, पार्टी के वरिष्ठ नेता और डॉक्टर अस्पताल में मौजूद थे।
उनकी मृत्यु के समय अस्पताल में मौजूद लोगों में उनके बड़े बेटे और बीएनपी के कार्यवाहक चेयरमैन तारेक रहमान, बहू डॉ. जुबैदा रहमान, नातिन जाइमा रहमान, छोटे बेटे की पत्नी शर्मिली रहमान सिथी, छोटे भाई शमीम एस्कंदर और बीएनपी महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर शामिल थे।
खालिदा जिया का निधन ऐसे समय हुआ है जब बांग्लादेश गंभीर राजनीतिक संक्रमण के दौर से गुजर रहा है। शेख हसीना सरकार के पतन के बाद देश में अंतरिम सरकार बनी और आम चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। खास बात यह है कि खालिदा जिया ने अपने निधन से एक दिन पहले, 29 दिसंबर को बोगरा-7 सीट से नामांकन दाखिल किया था। वे इस सीट से कई बार सांसद चुनी जा चुकी थीं।
खालिदा जिया ने 1991 से 1996 और 2001 से 2006 तक दो बार बांग्लादेश के प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने देश की राजनीति को दशकों तक दिशा दी। उनकी और शेख हसीना के बीच चली आ रही राजनीतिक प्रतिद्वंदिता बांग्लादेश की राजनीति का प्रमुख अध्याय रही है।
प्रधानमंत्री रहते हुए उन पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे थे, जिनके चलते उन्हें सजा और नजरबंदी का सामना करना पड़ा। हालांकि, 2025 में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद बदले राजनीतिक हालात में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सभी मामलों में बरी कर दिया था।
खालिदा जिया के निधन के बाद बीएनपी ने देशवासियों से उनके लिए दुआ और प्रार्थना की अपील की है। पार्टी ने कहा है कि जनाजे और अंतिम संस्कार का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा।
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