खुफिया एजेंसियों के हाथ तब्लीगी जमात और जिहादी डॉक्टरों के आतंकी मॉड्यूल के बीच गहरे कनेक्शन के अहम सबूत लगे हैं। फरीदाबाद से गिरफ्तार जिहादी महिला डॉक्टर शाहीन की गिरफ्तारी के बाद खुलासा हुआ कि उसे तब्लीगी जमात से टेरर फंडिंग मिलती थी। इसी फंड से विस्फोटक सामग्री खरीदने, विदेश यात्राएँ करने और मॉड्यूल को सक्रिय रखने का काम होता था। दिल्ली कार ब्लास्ट से जुड़े उमर, मुफ़्ती इरफ़ान और अन्य आरोपियों के तार भी जमात से जुड़ते पाए गए हैं।
जांच में सामने आया कि शाहीन के 7 बैंक खातों में पिछले 7 वर्षों में 1.55 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ, जिसमें 2014 से 2017 के बीच लाखों रुपये उसके खातों में भेजे गए। अब खुफिया विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि ये पैसा किन स्रोतों से आया और किन लोगों तक पहुँचाया गया।
इस खुलासे के बाद खुफिया एजेंसियाँ अलर्ट हो गई हैं। जमात से जुड़े 25-30 संदिग्ध मोबाइल नंबर अचानक स्विच ऑफ मिले हैं, जिनकी लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड और कनेक्शन खंगाले जा रहे हैं। दिल्ली, श्रीनगर, पहलगाम, पठानकोट, सहारनपुर, हापुड़, मुरादाबाद, बिजनौर से लेकर दुबई और ओमान तक के अंतरराष्ट्रीय लिंक सामने आ रहे हैं, जहाँ आतंकी गुप्त बैठकों के लिए आते-जाते थे।
अब जमात को निर्देश दिया गया है कि उसके यहाँ आने-जाने वाले हर व्यक्ति का नाम, पता, मोबाइल नंबर और फोटो खुफिया एजेंसियों व एटीएस को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराया जाए। कई संस्थानों के विदेशी खातों की भी जाँच शुरू हो चुकी है और एजेंसियाँ जल्द ही फंडिंग नेटवर्क की विस्तृत रिपोर्ट पेश कर सकती हैं।
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