भावनगर शहर में अशांति अधिनियम के उल्लंघन का पहला मामला सामने आया है। यह गुजरात में अहमदाबाद के बाद दूसरा और सौराष्ट्र क्षेत्र का पहला मामला बताया जा रहा है।
मामला शहर के क्रिसेंट इलाके से जुड़ा है, जो अशांत अधिनियम के तहत घोषित क्षेत्र में आता है। नियमों के अनुसार, इस क्षेत्र में किसी भी संपत्ति के ट्रांसफर के लिए कलेक्टर या SDM की पूर्व लिखित अनुमति लेना अनिवार्य है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, दार्सराज सिंह धर्मेंद्र सिंह गोहिल ने 26 अगस्त 2025 को अल्लाहरखभाई कादरभाई गिगानी को एक मकान बेच दिया। बिक्री समझौता किया गया, 93 लाख रुपये का भुगतान हुआ और खरीदार को मकान का कब्जा भी दे दिया गया।
हालांकि, इस पूरे लेन-देन के दौरान आवश्यक सरकारी अनुमति नहीं ली गई, जो कि अशांति अधिनियम के तहत अनिवार्य है।
अनुमति बाद में मांगी, लेकिन आवेदन खारिज
बताया जा रहा है कि विक्रेता ने 11 सितंबर 2025 को अनुमति के लिए आवेदन किया, लेकिन जांच और सुनवाई के बाद 17 फरवरी 2026 को यह आवेदन खारिज कर दिया गया। तब तक संपत्ति का ट्रांसफर और कब्जा पहले ही हो चुका था, जिससे अधिनियम की धारा 4 और 5 का उल्लंघन माना गया।
पुलिस कार्रवाई
इस मामले का खुलासा नगर पालिका अधिकारी द्वारा दस्तावेजों की जांच के दौरान हुआ। इसके बाद घोघा रोड पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने विक्रेता, खरीदार और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
भावनगर नगर पालिका के उपायुक्त आर. आर. सिंघल ने कहा कि अशांति अधिनियम लागू क्षेत्र में बिना अनुमति संपत्ति बिक्री गंभीर उल्लंघन है और इस मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
क्यों अहम है यह मामला?
भावनगर के कुछ इलाकों में 2023-2024 के दौरान अशांति अधिनियम लागू किया गया था, ताकि संवेदनशील क्षेत्रों में अवैध संपत्ति लेन-देन को रोका जा सके और कानून-व्यवस्था बनाए रखी जा सके।
इससे पहले यह कानून वडोदरा और सूरत जैसे शहरों में भी लागू किया जा चुका है।
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