दो सप्ताह तक चली बमबारी और सैन्य तनाव के बाद अमेरिका और ईरान के बीच हालात में कुछ नरमी देखने को मिल रही है। अमेरिका द्वारा ईरान पर सैन्य हमले रोकने के बाद ईरान ने भी पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर अपने हमले रोक दिए हैं। हालांकि क्षेत्रीय तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और दोनों देशों के नेताओं के हालिया बयानों से यह स्पष्ट है कि पश्चिम एशिया में स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि ईरान के साथ संघर्ष के दौरान अमेरिका के गोला-बारूद भंडार पर दबाव बढ़ गया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास हथियारों और गोला-बारूद का विशाल भंडार मौजूद है और उसकी सैन्य क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ा है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान को पीछे हटने पर मजबूर किया और इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को खुला रखने में सफलता हासिल की। उन्होंने कहा कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य का खुला रहना बेहद जरूरी है।
इस बीच ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का एक बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए होने वाले किसी भी समझौते में लेबनान पर जारी इजरायली सैन्य कार्रवाई को समाप्त करने का प्रावधान शामिल होना चाहिए। खामेनेई ने यह भी कहा कि ईरान हिज्बुल्लाह का समर्थन जारी रखेगा क्योंकि तेहरान इसे अपनी रणनीतिक जिम्मेदारी मानता है।
खामेनेई ने कहा कि “जिहाद और प्रतिरोध” ही आगे बढ़ने का मार्ग है और लगातार संघर्ष के बाद जीत अंततः उनके पक्ष में होगी। उनके इस बयान को पश्चिम एशिया में सक्रिय ईरान समर्थित समूहों के प्रति स्पष्ट समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।
खामेनेई के समर्थन पर प्रतिक्रिया देते हुए हिज्बुल्लाह के महासचिव शेख नईम कासिम ने सोशल मीडिया पर उनका आभार व्यक्त किया। कासिम ने कहा कि हिज्बुल्लाह अपने धैर्य, बलिदान और संघर्ष के रास्ते पर कायम रहेगा तथा इजरायल के खिलाफ चट्टान की तरह खड़ा रहेगा।
उधर, अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ईरान संघर्ष में मारे गए चार अमेरिकी सैनिकों को युद्ध में मारे गए सैनिकों की सामान्य सूची से अलग कर दिया गया है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन ने “विदेशी अभियान” नाम से एक नई श्रेणी बनाई है, जिसमें चार मृत सैनिकों और 207 घायल सैनिकों के नाम शामिल किए गए हैं। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि सूची में शामिल सभी घायल सैनिक केवल ईरान संघर्ष के दौरान ही घायल हुए थे या नहीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच फिलहाल सैन्य गतिविधियों में कमी आई है, लेकिन हिज्बुल्लाह, लेबनान और इजरायल से जुड़े मुद्दों के कारण क्षेत्रीय तनाव आगे भी बना रह सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी देशों के कदमों पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।
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