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नकली जज और फर्जी कोर्ट… विवादित मामलों की अपनी अदालत में करता था सुनवाई

गुजरात की राजधानी गांधीनगर में आरोपी ने नकली कोर्ट बनाकर बतौर ऑर्बिट्रेट जज अरबों रुपए की करीब 100 एकड़ सरकारी जमीन आने नाम कर ऑर्डर पारित कर डाले. खुद ही दस्तावेज तैयार कर जाली कोर्ट में पेश किए और सरकारी जमीन को पक्ष में करने का आदेश दे दिया.

Last updated: 2024/10/22 at 4:48 PM
One India News Team
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7 Min Read
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गांधीनगर में नकली कोर्ट बनाकर अरबों रुपये की जमीन अपने नाम करनेवाले नकली आर्बिट्रेशन जज मोरिस सैम्युल क्रिश्चियन के कुकर्मों का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने मोरिस को गिरफ्तार कर लिया है।

Contents
100 एकड़ से ज्यादा सरकारी जमीन के केस चलाए गांधीनगर में खड़ी की नकली आर्बिट्रेशन कचहरी 500 से ज्यादा केस में दिये हैं आदेश मोरिस ने आर्बिट्रेटर के तौर पर वसूले ₹30 लाख कोर्ट ने मोरिस के आदेश को रद करने का दिया आदेश हाईकोर्ट ने भी दी थी चेतावनी

गुजरात में नकली सरकारी कचहरी, नकली टोल बूथ, नकली स्कूल के बाद अब नकली आर्बिट्रेशन कचहरी और नकली जज मामले का पर्दाफाश हुआ है। मोरिस सैम्युल क्रिश्चियन नाम के वकील ने फर्जी आर्बिट्रेशन (बिना कोर्ट जाए विवाद का निपटारा) खड़ा करके, खुद ही आर्बिट्रेशन जज बनकर, खुद ही स्टाफ को रोका और खुद ही वकीलों को रोककर सौ एकड़ से ज्यादा जमीन के गैरकानूनी तरीके से आदेश दिए और अरबों की जमीन हथिया ली। इस मामले में सिविल कोर्ट ने मोरिस के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का आदेश दिया और पुलिस ने मोरिस को गिरफ्तार कर लिया है।

अहमदाबाद के पालड़ी में जमीन के स्वामित्व के मामले में हुए आदेश को गलत ठहराते हुए सिविल कोर्ट में आवेदन दाखिल किया गया था और इसी आवेदन की सुनवाई में पूरे मामले का पर्दाफाश हुआ। बाबूजी छनाजी ठाकोर ने पालड़ी में सरकारी जमीन में आर्बिट्रेशन जज मोरिस क्रिश्चियन के आदेश के खिलाफ सिविल कोर्ट में आवेदन दायर किया। जिसमें वकील ने खुलासा किया कि इस केस में सरकार और आवेदक के बीच कोई भी एग्रीमेंट नहीं हुआ था। आवेदक की तरफ से कभी भी आर्बिट्रेशन एक्ट की धारा 7 के तहत आर्बिट्रेटर की नियुक्ति के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।

आवेदनकर्ता और सरकार के बीच किसी भी प्रकार का एग्रीमेंट नहीं हुआ था। इसके साथ-साथ सीपीसी की धारा 89 के तहत भी कोर्ट ने आर्बिट्रेटर के समक्ष केस भेजा हो ऐसा भी नहीं हुआ था। ऐसे में कोई भी एक पक्षकार अपने आप आर्बिट्रेटर के बारे में निर्णय नहीं ले सकता। इस केस में मोरिस ने आवेदक के साथ धोखा करके या फिर उसके साथ मिलकर आवेदन तैयार करके खुद ही के समक्ष पेश किया है। जैसे खुद ही जज हो उस प्रकार आर्बिट्रेटर के तौर पर बिना किसी कानूनी कार्रवाई के ही आवेदक को सरकारी जमीन का मालिक करार दे दिया है। वकील ने कोर्ट से कहा कि नकली आर्बिट्रेटर जज मोरिस ने खुद ही सारी शक्ति अपने हाथ में लेकर सरकार के साथ बहुत बड़ा फ्रॉड किया है।

100 एकड़ से ज्यादा सरकारी जमीन के केस चलाए

कोर्ट ने इस बात का भी अवलोकन किया कि मोरिस क्रिश्चियन के फ्रॉड का यह एकमात्र केस नहीं है। सिर्फ इस एक कोर्ट के समक्ष ही अभी के केस के जैसे अन्य 10 केस पेंडिंग हैं। इन सभी केस के तहत की सरकारी एवं अन्य मिलकर 100 एकड़ से ज्यादा जमीन, जिसकी कीमत अरबों रुपए हो रही है। उन सभी जमीन के बारे में मोरिस ने बोगस जज बनकर आदेश दे दिए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि मोरिस के इस प्रकार के बोगस आर्बिट्रेशन आदेश के आधार पर कलेक्टर समेत सभी सरकारी अधिकारियों ने रेवेन्यू रिकॉर्ड में भी गलत एन्ट्री कर दी है।

गांधीनगर में खड़ी की नकली आर्बिट्रेशन कचहरी

इस मामले में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि प्रस्तुत केस में जमीन अहमदाबाद में, आवेदक अहमदाबाद के, जिला कलेक्टर कचहरी भी अहमदाबाद की। इस प्रकार संपूर्ण न्याय क्षेत्र अहमदाबाद का होने के बावजूद इसमें आर्बिट्रेशन का आदेश गांधीनगर कोर्ट ने किया है। यानी की मोरिस ने गांधीनगर में बोगस आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल कचहरी खड़ी कर दी थी और वहीं से सारे आदेश किए थे। गांधीनगर की नकली आर्बिट्रेशन कचहरी में मोरिस ने हाईकोर्ट के जज के पास हो ऐसा डायस बनाया था। एक चोपदार भी रखा हुआ था। गुजरात हाईकोर्ट में आये हुए आर्बिट्रेशन में खुद जज के तौर पर कार्यरत है, ऐसा वह सबको बताता था। इसी नकली कोर्ट में बैठकर मोरिस असली जज की तरह आवेदनकर्ताओं को करोड़ों की सरकारी जमीन के मालिक बना देता था।

500 से ज्यादा केस में दिये हैं आदेश

नकली आर्बिट्रेशन जज बनकर मोरिस क्रिश्चियन ने जमीन के स्वामित्व के मामले से जुड़े हुए इस प्रकार के 500 से ज्यादा केस में आदेश दिया है। आर्बिट्रेशन जज के आदेश के चलते जिला कलेक्टर समेत अन्य सरकारी अधिकारियों ने उस नकली आदेश को असली समझकर आदेश का कुछ हद तक अमल भी कर लिया। इसके चलते नकली आदेश के आधार पर रेवन्यू रेकर्ड में भी बदलाव किया गया।

मोरिस ने आर्बिट्रेटर के तौर पर वसूले ₹30 लाख

मोरिस ने आर्बिट्रेटर के तौर पर ₹30 लाख का चार्ज वसूल किया था और जमीन की कीमत ₹200 करोड़ तक बताई थी। कोर्ट ने कहा कि मोरिस खुद सर्व सत्ताधारी की तरह काम करता था और सारे कायदे कानून एक तरफ रखकर किसी निजी व्यक्ति को सरकारी जमीन का मालिक करार देकर करोड़ों की सरकारी जमीन निजी व्यक्तियों के नाम कर दी है।

कोर्ट ने मोरिस के आदेश को रद करने का दिया आदेश

सिविल कोर्ट ने आदेश दिया है कि कायदे से जिसका अस्तित्व ना हो ऐसी नकली आर्बिट्रेशन कोर्ट बनाकर मोरिस क्रिश्चियन ने जितने भी केस में, जितने भी आदेश दिए हैं, वे सब फर्जी आदेश माने जाएंगे। मोरिस खुद ही नकली आर्बिट्रेशन जज बनकर आदेश करता रहा और सरकार को धोखा देता रहा। इस प्रकार किए गए सभी नकली आदेश कानूनीतौर पर गलत हैं, इसलिए सभी आदेश रद किए जाएं। इस प्रकार के आदेश के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया कर सजा भी हो सकती है।

हाईकोर्ट ने भी दी थी चेतावनी

इससे पहले मोरिस क्रिश्चियन के खिलाफ हाईकोर्ट में भी कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट का कार्रवाई हुई थी। मोरिस ने हाईकोर्ट से माफी मांगी थी और हाईकोर्ट ने मोरिस को इस प्रकार नकली आदेश नहीं देने की चेतावनी भी दी थी। मोरिस के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत भी दर्ज की गई थी, लेकिन उसने कोर्ट के आदेश को नजरअंदाज कर धोखाधड़ी करता रहा।

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