पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के तारातला इलाके में बुधवार, 24 जून 2026 की दोपहर एक बड़ा हादसा हो गया। ब्रेस ब्रिज के पास ट्रांसपोर्ट डिपो रोड पर बनाए जा रहे एक गोदाम की छत और लोहे का शेड अचानक भरभराकर गिर गया। प्रारंभिक मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हादसे में पाँच मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 50 से अधिक मजदूरों के मलबे में फँसे होने की आशंका जताई जा रही है।
हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। गोदाम के आसपास मौजूद स्थानीय लोगों और अन्य मजदूरों ने सबसे पहले राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग, आपदा प्रबंधन समूह और सिविल डिफेंस की टीमें घटनास्थल पर पहुँच गईं।
दोपहर करीब 12 बजे अचानक गिरा गोदाम का शेड
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसा बुधवार दोपहर करीब 12 बजे हुआ। उस समय निर्माणाधीन गोदाम के अंदर और आसपास बड़ी संख्या में मजदूर काम कर रहे थे। इसी दौरान गोदाम की छत और शेड का बड़ा हिस्सा अचानक नीचे गिर गया।
हादसा इतना अचानक हुआ कि अंदर काम कर रहे मजदूरों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका। छत गिरने की तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुँचे और मलबे में दबे मजदूरों को निकालने की कोशिश शुरू की।
कुछ ही समय में पुलिस और दमकल विभाग की कई गाड़ियाँ भी घटनास्थल पर पहुँच गईं। बचाव दल ने इलाके की घेराबंदी करते हुए मलबा हटाने का अभियान शुरू किया।
#WATCH | Kolkata | West Bengal | Search and rescue operation underway at the site where an under-construction godown shed collapsed in Taratala. https://t.co/O68iBSS8Lb pic.twitter.com/rU10750Fnl
— ANI (@ANI) June 24, 2026
कई मजदूरों को सुरक्षित निकाला गया
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राहत एवं बचाव टीमों ने अब तक कई मजदूरों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। घायलों को एम्बुलेंस की सहायता से नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इनमें से कुछ मजदूरों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
अस्पतालों को भी अलर्ट पर रखा गया है, ताकि घायलों को तत्काल इलाज उपलब्ध कराया जा सके। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद मजदूरों की संख्या तथा उनकी पहचान से संबंधित जानकारी जुटा रहे हैं।
प्रारंभिक रिपोर्ट में 50 से अधिक मजदूरों के मलबे के नीचे फँसे होने की आशंका जताई गई है। हालांकि बचाव अभियान पूरा होने के बाद ही हताहतों और फँसे लोगों की वास्तविक संख्या स्पष्ट हो सकेगी।
बचाव अभियान में सेना को भी लगाया गया
हादसे की गंभीरता को देखते हुए भारतीय सेना को भी राहत एवं बचाव अभियान में लगाया गया है। सेना के जवान पुलिस, दमकल विभाग, आपदा प्रबंधन समूह और सिविल डिफेंस की टीमों के साथ मिलकर मलबे में फँसे मजदूरों को निकालने का प्रयास कर रहे हैं।
भारी लोहे के ढाँचे और मलबे को हटाने के लिए क्रेन, गैस कटर तथा अन्य अत्याधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। बचावकर्मी सावधानीपूर्वक मलबा हटा रहे हैं, ताकि अंदर फँसे लोगों को कोई अतिरिक्त नुकसान न पहुँचे।
घटनास्थल के आसपास आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे घटनास्थल के पास भीड़ न लगाएँ और बचाव कार्य में लगी एजेंसियों को अपना काम करने दें।
राज्य सरकार ने सक्रिय किया कंट्रोल रूम
पश्चिम बंगाल सरकार ने हादसे के बाद स्थिति की निगरानी के लिए कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिया है। वरिष्ठ अधिकारी राहत एवं बचाव अभियान पर लगातार नजर रख रहे हैं। मजदूरों के परिजनों को जानकारी उपलब्ध कराने के लिए भी प्रशासनिक स्तर पर व्यवस्था की जा रही है।
राज्य सरकार ने संबंधित विभागों को राहत कार्यों में तेजी लाने और घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुँचकर बचाव अभियान की समीक्षा कर रहे हैं।
हादसे के कारणों की होगी जाँच
निर्माणाधीन गोदाम की छत किस कारण से गिरी, फिलहाल इसका स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। पुलिस और संबंधित विभाग हादसे के कारणों की जाँच करेंगे। निर्माण के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जाएगी।
जाँच में गोदाम के स्वीकृत नक्शे, निर्माण की अनुमति, इस्तेमाल की गई सामग्री, लोहे के शेड की क्षमता और मौके पर मजदूरों के लिए उपलब्ध सुरक्षा उपकरणों की जानकारी शामिल हो सकती है।
निर्माण कार्य करा रहे ठेकेदार, गोदाम मालिक और संबंधित अधिकारियों से भी पूछताछ की जा सकती है। जाँच में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल प्रशासन की पहली प्राथमिकता मलबे में फँसे सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालना है। राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है और आधिकारिक जानकारी के आधार पर हताहतों की संख्या में बदलाव हो सकता है।
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