कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट के 1990 अपहरण और हत्या मामले में 36 साल बाद बड़ी कानूनी कार्रवाई हुई है। जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी SIA ने श्रीनगर की विशेष अदालत में 737 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में प्रतिबंधित जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट यानी JKLF के तत्कालीन शीर्ष कमांडर यासीन मलिक और उसके चार साथियों को मुख्य आरोपितों में शामिल किया गया है।
यासीन मलिक फिलहाल टेरर फंडिंग मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है। 2022 में दिल्ली की विशेष NIA अदालत ने उसे टेरर फंडिंग और अलगाववादी गतिविधियों से जुड़े मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अदालत ने दो उम्रकैद और 10-10 साल की कई सजाएं सुनाई थीं, जो साथ-साथ चलनी हैं।
SIA की चार्जशीट के मुताबिक, अप्रैल 1990 में सरला भट्ट के अपहरण और हत्या की साजिश में यासीन मलिक की भूमिका रही। एजेंसी का आरोप है कि मलिक ने खुर्शीद अहमद चालको, अब्दुल हमीद शेख, मोहम्मद यूसुफ सोफी उर्फ इदरीस और गुलाम मोहम्मद टपलू को इस वारदात को अंजाम देने के लिए लगाया था। इनमें से तीन आरोपितों की मौत हो चुकी है, जबकि खुर्शीद अहमद चालको फरार बताया जा रहा है और उसके पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में छिपे होने की आशंका जताई गई है।
सरला भट्ट कश्मीरी पंडित समुदाय से थीं और श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज यानी SKIMS में स्टाफ नर्स के रूप में कार्यरत थीं। वह दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले की रहने वाली थीं। 18 अप्रैल 1990 को उनका अपहरण किया गया था। चार्जशीट के अनुसार, उन्हें अलग-अलग जगहों पर रखा गया और बाद में गोली मारकर हत्या कर दी गई। उनका शव श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके में मिला था।
चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि सरला भट्ट के शव के पास एक नोट मिला था, जिसमें उन्हें सुरक्षा बलों का मुखबिर बताया गया था। SIA ने अपनी जांच में इस आरोप को हत्या को सही ठहराने के लिए गढ़ा गया बहाना बताया है। एजेंसी के मुताबिक, इस हत्या का मकसद कश्मीरी पंडित समुदाय में डर पैदा करना और घाटी से उनके पलायन को तेज करना था।
SIA ने अदालत के सामने प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य, मेडिकल, फॉरेंसिक, बैलिस्टिक और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री के आधार पर आरोप तय किए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, मामले में अपहरण, हत्या, आपराधिक साजिश, सबूत नष्ट करने, TADA और आर्म्स एक्ट से जुड़ी धाराएं लगाई गई हैं।
यह मामला लंबे समय तक ठंडे बस्ते में रहा था। SIA ने अदालत को बताया कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी संगठनों द्वारा बनाए गए डर और धमकी के माहौल के कारण कई वर्षों तक गवाह आगे नहीं आ सके। बाद में जांच एजेंसी ने पुराने रिकॉर्ड, नए बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले को आगे बढ़ाया।
यासीन मलिक पर इससे पहले भी कई गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई हुई है। जनवरी 1990 में श्रीनगर में भारतीय वायुसेना के जवानों पर हुए हमले के मामले में भी उसका नाम आया था। इस मामले में एक पूर्व IAF कर्मचारी और अभियोजन पक्ष के अहम गवाह ने अदालत में यासीन मलिक की पहचान मुख्य शूटर के रूप में की थी। इस हमले में चार वायुसेना कर्मियों की मौत और कई अन्य घायल हुए थे।
1989 में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के अपहरण मामले में भी यासीन मलिक आरोपित है। इस मामले में रुबैया सईद ने 2022 में अदालत में पांच आरोपितों की पहचान की थी, जिनमें यासीन मलिक भी शामिल था। यह मुकदमा अभी न्यायिक प्रक्रिया में है।
NIA ने यासीन मलिक की टेरर फंडिंग केस में उम्रकैद की सजा को मृत्युदंड में बदलने की मांग भी की है। दिल्ली हाई कोर्ट में इस अपील पर सुनवाई चल रही है। NIA का तर्क है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सजा बढ़ाई जानी चाहिए।
सरला भट्ट हत्याकांड की नई चार्जशीट कश्मीरी पंडितों के खिलाफ 1990 के दशक में हुई हिंसा से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी कदम मानी जा रही है। इस कार्रवाई के बाद अब अदालत में सुनवाई आगे बढ़ेगी और यह तय होगा कि 36 साल पुराने इस मामले में आरोपों पर न्यायिक प्रक्रिया किस दिशा में जाती है।
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