अमेरिका के साथ टैरिफ वॉर के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने रुख पर अडिग रहे। भारत ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा और चीन व रूस दोनों के साथ संबंध और गहरे किए। पीएम मोदी की इस कूटनीतिक दृढ़ता की अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हो रही है। इजरायल ने इसे अपने लिए सबक बताते हुए कहा है कि उसे मोदी से सीखने की आवश्यकता है।
इजरायल के प्रमुख मीडिया पोर्टल The Jerusalem Post ने जकी शालोम द्वारा लिखित एक लेख में इस बात पर जोर दिया कि पीएम मोदी ने राष्ट्रीय सम्मान को सर्वोपरि रखकर दुनिया को एक नई दृष्टि दी है। रिपोर्ट का शीर्षक था— “What Israel can Learn from Modi: National honor as strategic asset”। इसमें कहा गया कि राष्ट्रीय सम्मान कोई विलासिता नहीं बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक संपत्ति है। इस दृष्टिकोण ने मोदी के नेतृत्व में भारत को अधिक आत्मविश्वासी और सम्मानजनक वैश्विक पहचान दिलाई है।

भारत-अमेरिका संबंध और ट्रंप की बयानबाजी
रिपोर्ट में अमेरिका और भारत के रिश्तों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इसमें बताया गया कि टैरिफ विवाद, भारत-रूस संबंधों और अमेरिका की भारत-पाकिस्तान सीमा विवाद पर स्थिति ने दोनों देशों के बीच विश्वास को कमजोर किया। डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर “दुनिया में सबसे ज्यादा टैरिफ” लगाने का आरोप लगाया और बदले में भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ बढ़ा दिया। उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था को “डेड इकोनॉमी” भी कहा और पीएम मोदी पर यूक्रेन को व्यापारिक मदद देने का आरोप लगाया।
ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान विवाद पर मध्यस्थता की पेशकश तक कर डाली, जिसका पाकिस्तान ने स्वागत किया और नोबेल पुरस्कार तक की बात कह दी। लेकिन भारत ने कभी भी अमेरिका की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं किया। इसके चलते दोनों देशों के बीच खटास आई, बावजूद इसके मोदी ने अमेरिका के सामने झुकने के बजाय सख्त रुख अपनाया। रिपोर्ट के अनुसार, मोदी का यह रुख केवल आर्थिक या सैन्य कारणों से नहीं बल्कि भारत की राष्ट्रीय और व्यक्तिगत सम्मान की भावना से जुड़ा था।
इजरायल के लिए सबक: खान यूनिस हमला
जकी शालोम ने खान यूनिस हमले का उदाहरण देते हुए इजरायल को मोदी से सीख लेने की बात कही। इस हमले में इजरायली गोलीबारी से 20 लोग मारे गए थे, जिनमें पत्रकार भी शामिल थे। घटना के तुरंत बाद इजरायली सेना ने इसे “दुखद घटना” बताते हुए माफी माँग ली। रिपोर्ट के अनुसार, सेना ने पूरी जानकारी जुटाए बिना ही जिम्मेदारी स्वीकार कर ली, जबकि मृतकों में हमास के सदस्य भी शामिल थे। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश गया कि इजरायल ने निर्दोष नागरिकों की हत्या की।
लेख में कहा गया कि इस तरह की जल्दबाजी कमजोरी समझी जा सकती है और दुश्मन इसका फायदा उठा सकते हैं। इसके विपरीत, पीएम मोदी ने जब ट्रंप की ओर से लगातार मौखिक हमले झेले, तो उन्होंने कभी माफी नहीं माँगी बल्कि मजबूती से जवाब दिया और देश का सम्मान बनाए रखा।