केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ वामपंथी नेता वी.एस. अच्युतानंदन का सोमवार, 21 जुलाई 2025 को तिरुवनंतपुरम के एक निजी अस्पताल में 101 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे और 26 जून 2025 को हार्ट अटैक आने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 2019 से वे सक्रिय राजनीति से पूरी तरह दूर हो गए थे और अपने बेटे के घर पर रह रहे थे। अच्युतानंदन का राजनीतिक जीवन भारतीय वामपंथी राजनीति में एक लंबी और विवादास्पद यात्रा रही, विशेष रूप से 2006 से 2011 तक वे केरल के मुख्यमंत्री पद पर रहे जब राज्य में CPI(M) की सरकार थी।
वी.एस. अच्युतानंदन सिर्फ एक राजनेता नहीं बल्कि विचारधारा के स्तर पर भी विवादों में रहे। 2010 में दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता में उन्होंने केरल को एक ‘इस्लामी राज्य’ बनाने की साजिशों का खुलासा किया था। इस प्रेस वार्ता का 27 सेकेंड का वीडियो 2023 में बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर साझा किया था, जिसमें अच्युतानंदन यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि इस्लामी कट्टरपंथी संगठन युवाओं का ब्रेनवॉश कर रहे हैं, उन्हें पैसे देकर हिंदू लड़कियों से शादी करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, और यह सब एक दीर्घकालीन योजना का हिस्सा है जिसका लक्ष्य है केरल को अगले 20 वर्षों में एक इस्लामी राज्य में बदल देना। अच्युतानंदन ने यह भी कहा था कि इस योजना का असर राज्य में मुस्लिम आबादी में हो रही वृद्धि के रूप में देखा जा सकता है। यह बयान इतना विवादास्पद था कि इसे फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ के टीज़र में शामिल किया गया था, लेकिन बाद में सेंसर बोर्ड ने इसे फिल्म से हटा दिया था।
Their plan is to make Kerala a Muslim state in the next 20 years. For that they are luring youngsters. Offering them money. Insisting them to marry Hindu girls to increase Muslim population. This is how they are growing their majority. And these tricks are working!
– V S… pic.twitter.com/V7mmaT6aZa
— Amit Malviya (@amitmalviya) May 3, 2023
उनके जीवन का एक और विवादास्पद पहलू 26/11 मुंबई हमले के शहीद मेजर संदीप उन्नीकृष्णन से जुड़ा था। मेजर संदीप, जो केरल से ताल्लुक रखते थे, अपनी शहादत के बाद पूरे देश में सम्मानित किए गए, लेकिन उस समय केरल के मुख्यमंत्री अच्युतानंदन ने उनकी शहादत को लेकर बेहद असंवेदनशील टिप्पणी कर दी थी। जब कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के साथ वे मेजर के घर नहीं गए, तो उन्होंने कहा, “अगर वह (मेजर संदीप) का घर नहीं होता, तो वहां एक कुत्ता भी नहीं जाता।” उनकी इस टिप्पणी की देशभर में भारी आलोचना हुई थी और इसे एक वीर सपूत व उसके परिवार के अपमान के रूप में देखा गया। इसके बाद भी केरल सरकार की ओर से मेजर के अंतिम संस्कार में कोई वरिष्ठ नेता नहीं गया, जो उस समय सरकार की संवेदनशीलता पर सवाल उठाता रहा।
वी.एस. अच्युतानंदन का जीवन एक ओर जहां केरल में वामपंथी राजनीति की मज़बूती का प्रतीक रहा, वहीं दूसरी ओर उनके कई बयानों और निर्णयों ने राष्ट्रीय स्तर पर विवादों को जन्म दिया। उनके निधन के साथ ही एक लंबा और जटिल राजनीतिक अध्याय समाप्त हो गया, जिसकी छाया केरल और भारतीय राजनीति पर लंबे समय तक बनी रहेगी।