कोलकाता लॉ स्टूडेंट गैंगरेप केस में SIT की जांच में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। यह घटना न केवल पूर्व-नियोजित थी बल्कि इसके पीछे मुख्य आरोपी तृणमूल कार्यकर्ता मनोजित मिश्रा और उसके दो साथियों प्रतीम मुखर्जी व जैद अहमद की एक लंबी आपराधिक पृष्ठभूमि भी उजागर हुई है। चौथा आरोपी कॉलेज का सुरक्षा गार्ड निकला, जो न केवल घटनास्थल पर मौजूद था, बल्कि उसने घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग में भी भूमिका निभाई।
SIT की रिपोर्ट के अनुसार, इन आरोपियों ने पहले भी कॉलेज की छात्राओं के साथ यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़ और ब्लैकमेलिंग जैसी घटनाओं को अंजाम दिया है। ये लोग मोबाइल पर निजी वीडियो रिकॉर्ड करते थे और फिर उन्हें ब्लैकमेलिंग और सोशल मीडिया पर बदनाम करने के लिए इस्तेमाल करते थे। आरोपियों ने घटना वाले दिन भी छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार की पूर्व-योजना बनाई थी, और सुरक्षा गार्ड का फोन तक छीन लिया ताकि वीडियो लीक न हो।
मुख्य आरोपी मनोजित मिश्रा का आपराधिक इतिहास बेहद गंभीर है — उस पर पहले से छेड़छाड़, जबरन वसूली, मारपीट और पुलिसकर्मी पर हमला जैसे आरोप दर्ज हैं, बावजूद इसके उसे आसानी से जमानत मिल जाती रही है। कॉलेज सूत्रों के मुताबिक वह ‘मैंगो’ नाम से भी जाना जाता है और छात्राओं की तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ कर उन्हें व्हाट्सएप ग्रुपों में शेयर करता था।
पुलिस अब तक 17 छात्रों की सूची तैयार कर चुकी है, जो घटना के समय कॉलेज में मौजूद थे और उनसे पूछताछ की जाएगी। यह मामला न केवल एक छात्रा की अस्मिता से खिलवाड़ का है, बल्कि एक शैक्षणिक संस्थान में सुनियोजित अपराध तंत्र की भी भयावह तस्वीर पेश करता है।
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