भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम लिए बिना उन पर परोक्ष रूप से टिप्पणी की है। उन्होंने यह संदेश दिया कि दुनिया वैश्विक कार्यबल की जरूरत को अनदेखा नहीं कर सकती। जयशंकर न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि वैश्विक कार्यबल एक वास्तविकता है और इसे नजरअंदाज करना असंभव है। उनके शब्दों में, “यह एक सच्चाई है। आप इससे भाग नहीं सकते। वैश्विक कार्यबल राजनीतिक बहस का विषय हो सकता है, लेकिन इससे कोई बच नहीं सकता। कई देशों में सिर्फ उनकी आबादी के आधार पर श्रम की मांग पूरी नहीं हो पाती है।”
New York में UNGA की Sidelines पर G20 के विदेश मंत्रियों की बैठक में बोलते हुए विदेश मंत्री S Jaishankar ने ट्रंप का बिना नाम लिए कहा- 'दोहरे मापदंड साफ तौर पर दिख रहे हैं, हम विकास को खतरा बनाकर हम शांति स्थापित नहीं कर सकते।'#Jaishankar #USIndiaRelations #DoubleStandards… pic.twitter.com/G3ufanOWjF
— Zee Business (@ZeeBusiness) September 26, 2025
जयशंकर ने एक अधिक स्वीकार्य, समकालीन और कुशल वैश्विक कार्यबल मॉडल बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह मॉडल वितरित वैश्विक कार्यस्थलों पर आधारित होना चाहिए और यही वह सवाल है जिसका समाधान अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को करना होगा।
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब ट्रंप प्रशासन व्यापार, शुल्क और आव्रजन नीतियों पर लगातार सख्त रुख अपना रहा है। खासतौर पर H-1B वीजा को लेकर। लंबे समय से यह वीजा भारतीय आईटी और टेक्नोलॉजी पेशेवरों के लिए अमेरिका में नौकरी पाने का सबसे अहम जरिया रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, इसके करीब तीन-चौथाई लाभार्थी भारतीय होते हैं।
लेकिन अब ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा पर एक लाख डॉलर की नई फीस लगा दी है। यह रकम पहले से मौजूद फाइलिंग और लीगल खर्चों के अलावा होगी। इससे वीजा बेहद महंगा हो जाएगा और भारतीय पेशेवरों व कंपनियों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
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