खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू के संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) ने क्रोएशिया में स्थित भारतीय दूतावास में तोड़फोड़ कर खालिस्तानी झंडा फहराया और भारत के खिलाफ गंभीर धमकियाँ दीं। इस घटना के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने भारत विरोधी तत्वों द्वारा दूतावास में की गई “अनधिकृत घुसपैठ और तोड़फोड़” की कड़ी निंदा की है।
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस मामले को भारत और क्रोएशिया—दोनों स्तरों पर क्रोएशियाई अधिकारियों के समक्ष सख्ती से उठाया गया है। MEA ने दोषियों के खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग की है। मंत्रालय ने कहा कि ऐसी हरकतें न केवल गैरकानूनी हैं, बल्कि इनके पीछे छिपे चरित्र और इरादों को भी उजागर करती हैं।
यह घटना बुधवार, 21 जनवरी 2026 की देर रात की बताई जा रही है और क्रोएशिया स्थित भारतीय मिशन में इस तरह की यह पहली घटना है। सामने आए वीडियो में देखा गया कि खालिस्तानी समर्थक दूतावास परिसर में घुसे, तिरंगे को उतारकर उसकी जगह खालिस्तानी झंडा फहराया और खालिस्तान समर्थक नारे लगाए। दूतावास की बाउंड्री वॉल और साइनबोर्ड पर ‘खालिस्तान जिंदाबाद, हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ जैसे आपत्तिजनक नारे लिखे गए।
भारतीय सरकार ने क्रोएशिया के ज़ाग्रेब स्थित भारतीय दूतावास में घुसपैठ और तोड़फोड़ की घटना की कड़ी निंदा की है।
इससे पहले खालिस्तानी कट्टरपंथियों ने आधी रात को भारतीय ध्वज हटाकर भारतीय दूतावास परिसर के भीतर खालिस्तानी झंडा लगा दिया था।
भारत ने इस मामले को नई दिल्ली और ज़ाग्रेब… pic.twitter.com/VTMnf90e4H
— One India News (@oneindianewscom) January 23, 2026
वीडियो में दूतावास की दीवार पर ‘26/01’ लिखे जाने और गणतंत्र दिवस कार्यक्रम के दौरान हमले की धमकी भी दिखाई दी। खालिस्तानी समर्थकों ने खुले तौर पर भारत की संप्रभुता को चुनौती देने की कोशिश की। इसके साथ ही आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने एक वीडियो जारी कर इस घटना की जिम्मेदारी ली।
पन्नू ने 26 जनवरी को दिल्ली को निशाना बनाने की धमकी दी और इंडिया गेट के ऊपर स्नाइपर निशान वाली तस्वीर भी साझा की। वीडियो में उसने 1984 के गोल्डन टेम्पल (दरबार साहिब) में हुए भारतीय सेना के ऑपरेशन का उल्लेख करते हुए भड़काऊ बयान दिए। उसने यह भी दावा किया कि ‘पंजाब को भारतीय कब्जे से आज़ाद कराने’ के बाद भारतीय दूतावास को तथाकथित ‘डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ खालिस्तान’ के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि इस तरह की घटनाएँ खालिस्तानी और SFJ जैसे संगठनों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती गतिविधियों की ओर इशारा करती हैं। खास बात यह है कि क्रोएशिया में पहले खालिस्तानी तत्वों की मौजूदगी की कोई बड़ी रिपोर्ट सामने नहीं आई थी।
यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब भारत यूरोप के साथ अपने संबंधों को और मजबूत कर रहा है। यूरोपियन यूनियन के साथ एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते के साथ-साथ सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर भी जल्द हस्ताक्षर होने की संभावना है। क्रोएशिया, यूरोपियन यूनियन और NATO का सदस्य होने के कारण यह मामला भारत के लिए कूटनीतिक और सुरक्षा दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।
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