महाराष्ट्र के नवी मुंबई स्थित वाशी के एक सरकारी अस्पताल में बच्चों के अतिरिक्त पौष्टिक आहार से संबंधित एक पुस्तिका को लेकर नया विवाद सामने आया है। अस्पताल में अभिभावकों को वितरित की जा रही इस पोषण पुस्तिका में शिशुओं और बच्चों के लिए सुझाए गए खाद्य पदार्थों की सूची में बीफ (गोमांस) का उल्लेख किए जाने पर हिंदू संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। मामला सामने आने के बाद यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
जानकारी के अनुसार, उक्त पुस्तिका बच्चों के पोषण और अतिरिक्त आहार संबंधी मार्गदर्शन के उद्देश्य से तैयार की गई थी। हालांकि इसमें शामिल खाद्य पदार्थों की सूची में बीफ का उल्लेख होने पर हिंदू जनजागृति समिति (HJS) ने गंभीर आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि महाराष्ट्र जैसे राज्य में, जहां गोहत्या पर कानूनी प्रतिबंध लागू है और गाय को विशेष सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व प्राप्त है, वहां सरकारी अस्पताल की सामग्री में इस प्रकार का उल्लेख अनुचित और आपत्तिजनक है।
हिंदू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र राज्य समन्वयक सुनील घनवट ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लिखित शिकायत सौंपते हुए पुस्तिका तैयार करने, प्रकाशित करने और उसे स्वीकृति देने वाले सभी जिम्मेदार अधिकारियों तथा इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (IAP) के संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। संगठन का आरोप है कि इस प्रकार की सामग्री करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकती है।
इस मामले में नवी मुंबई महानगरपालिका के अतिरिक्त आयुक्त सुनील पवार को भी एक अलग ज्ञापन सौंपा गया है। प्रतिनिधिमंडल में रवींद्र नलावड़े, अशोक सावंत और गोविंद प्रसाद दुबे सहित अन्य पदाधिकारी शामिल थे। इसके अलावा शिकायत की एक प्रति नवी मुंबई पुलिस आयुक्त को भी भेजी गई है, ताकि मामले की जांच कर उचित कानूनी कार्रवाई की जा सके।

हिंदू जनजागृति समिति का कहना है कि हिंदू धर्म में गाय को माता के समान सम्मान दिया जाता है। संगठन के अनुसार, जिन शिशुओं को किसी कारणवश मां का दूध नहीं मिल पाता, उनके पालन-पोषण में गाय के दूध को महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में बच्चों के पोषण संबंधी सरकारी साहित्य में बीफ की सिफारिश को समाज के एक बड़े वर्ग की धार्मिक आस्थाओं के विपरीत बताया गया है।
संगठन ने अपनी शिकायत में देशी गौवंश की घटती संख्या पर भी चिंता जताई है। समिति का कहना है कि गिर, साहीवाल और देवनी जैसी भारतीय नस्लों के संरक्षण की आवश्यकता है। साथ ही यह भी दावा किया गया कि विश्व के कई देशों में भारतीय गौवंश और काउ थेरेपी जैसे विषयों पर शोध एवं रुचि बढ़ रही है, जबकि भारत में ही इस प्रकार की सामग्री प्रकाशित होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
हिंदू जनजागृति समिति ने मांग की है कि इस पुस्तिका को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए और राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों से इसकी प्रतियां जब्त कर हटाई जाएं। संगठन ने यह भी कहा है कि यदि प्रशासन शीघ्र कार्रवाई नहीं करता है तो राज्यव्यापी जनजागरण अभियान और आंदोलन शुरू किया जाएगा।
फिलहाल इस मामले में अस्पताल प्रशासन और इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि विवाद बढ़ने के बाद संबंधित विभागों द्वारा मामले की समीक्षा किए जाने की संभावना जताई जा रही है। आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।
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