संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के मंच पर भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को उसके आरोपों पर कड़ा और स्पष्ट जवाब दिया है। सिंधु जल संधि, सीमा पार आतंकवाद और जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भारत ने पाकिस्तान की आलोचना करते हुए कहा कि जो देश आतंकवाद को अपनी सरकारी नीति का हिस्सा बनाता है, वह सहयोग, विश्वास और सद्भावना पर आधारित अंतरराष्ट्रीय समझौतों का लाभ लेने की उम्मीद नहीं कर सकता।
संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रतिनिधि और सचिव अनुपमा सिंह ने परिषद की बैठक में पाकिस्तान के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि 1960 में हस्ताक्षरित सिंधु जल संधि वर्तमान समय की चुनौतियों और वास्तविकताओं के अनुरूप नहीं रह गई है। उन्होंने कहा कि पिछले छह दशकों में दुनिया और क्षेत्रीय परिस्थितियों में बड़े बदलाव आए हैं, इसलिए इस समझौते को मौजूदा संदर्भों से अलग करके नहीं देखा जा सकता।
#WATCH | First Secretary at the Permanent Mission of India to the United Nations, Anupama Singh says, "Jammu and Kashmir was, is and will always remain an integral and inalienable part of India. The only unresolved issue is Pakistan's illegal occupation of Indian territories and… pic.twitter.com/Kjr0mq1STZ
— ANI (@ANI) June 18, 2026
भारत ने स्पष्ट रूप से कहा कि एक ओर पाकिस्तान लगातार सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देता है, आतंकवादी ढांचों को संरक्षण प्रदान करता है और भारत विरोधी गतिविधियों को समर्थन देता है, जबकि दूसरी ओर वह भारत से सहयोग और विश्वास की अपेक्षा करता है। भारत के अनुसार यह दोनों बातें एक साथ संभव नहीं हैं। सहयोग और विश्वास तभी संभव है जब दोनों पक्ष अंतरराष्ट्रीय दायित्वों और शांति के सिद्धांतों का सम्मान करें।
बैठक के दौरान जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) द्वारा दिए गए बयानों को भी भारत ने पूरी तरह खारिज कर दिया। अनुपमा सिंह ने दो टूक कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। उन्होंने कहा कि इस विषय पर भारत का रुख पूरी तरह स्पष्ट और अपरिवर्तित है।
भारत ने आगे कहा कि अब जम्मू-कश्मीर से जुड़ा केवल एक ही मुद्दा शेष है और वह है पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले भारतीय क्षेत्रों को मुक्त कराना। भारतीय प्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों का उपयोग अपनी घरेलू विफलताओं और आंतरिक समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए करता है। उन्होंने कहा कि झूठे प्रचार और भ्रामक अभियानों के जरिए वास्तविकता को नहीं बदला जा सकता।
भारत ने हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले का भी उल्लेख किया, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। भारत ने कहा कि इस आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है और जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस, विश्वसनीय और सत्यापित कदम नहीं उठाता, तब तक स्थिति में बदलाव की संभावना नहीं है।
भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान को अपने आंतरिक मामलों पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह देते हुए कहा कि आतंकवाद, कट्टरपंथ और अस्थिरता को बढ़ावा देने वाली नीतियां स्वयं पाकिस्तान के लिए भी नुकसानदायक साबित हुई हैं। भारत ने पाकिस्तान को एक ऐसे देश के रूप में प्रस्तुत किया जो लंबे समय से अपनी नीतियों के परिणामों से जूझ रहा है।
UNHRC में भारत के इस सख्त रुख को अंतरराष्ट्रीय मंच पर आतंकवाद के खिलाफ उसकी लगातार जारी नीति का हिस्सा माना जा रहा है। भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि आतंकवाद और बातचीत, हिंसा और सहयोग, दोनों एक साथ नहीं चल सकते। साथ ही भारत ने यह भी दोहराया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर उसका रुख पहले की तरह दृढ़ और स्पष्ट रहेगा।
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