ट्रंप की टैरिफ धमकी का भारत पर संभावित असर
ब्रिक्स समिट 2025 में भारत की प्रभावशाली मौजूदगी और WTO नियमों के उल्लंघन को लेकर जताई गई चिंता के बाद अमेरिका की प्रतिक्रिया काफी आक्रामक रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि जो भी देश ब्रिक्स की तथाकथित “अमेरिका विरोधी” नीतियों का समर्थन करेगा, उस पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा—और इसमें कोई अपवाद नहीं होगा। यह बयान भले ही बिना नाम लिए दिया गया हो, लेकिन संकेत सीधे तौर पर भारत जैसे प्रमुख ब्रिक्स देशों की ओर है।
ट्रंप की इस धमकी का सीधा असर भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों पर पड़ सकता है। फिलहाल दोनों देशों के बीच एक व्यापक ट्रेड डील लगभग अंतिम चरण में है, जिसमें कृषि, श्रम-प्रधान उद्योगों और टेक्नोलॉजी जैसे अहम क्षेत्रों पर बातचीत जारी है। लेकिन ट्रंप के इस बयान से इस डील पर असमंजस का माहौल बन गया है। भारत पहले ही चावल, गेहूं, डेयरी और आनुवांशिक रूप से संशोधित (GMO) फसलों पर अमेरिकी दबाव के आगे झुकने से इनकार कर चुका है। भारत श्रमिकों की सुरक्षा और स्थानीय उद्योगों के संरक्षण पर समझौता नहीं करना चाहता।

ट्रंप की नाराज़गी के पीछे एक कारण यह भी माना जा रहा है कि भारत ने ब्रिक्स मंच से न केवल वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज बुलंद की, बल्कि पहलगाम आतंकी हमले जैसे मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाकर पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बढ़ाया—जो अमेरिका की रणनीतिक प्राथमिकताओं के अनुरूप नहीं है। साथ ही, भारत ने WTO के नियमों की अनदेखी करते हुए लगाए गए टैरिफ पर आपत्ति जताई, जो स्पष्ट रूप से अमेरिका की नीति की आलोचना थी।
हालांकि भारत ने ब्रिक्स घोषणापत्र में अमेरिका का नाम नहीं लिया, लेकिन ट्रंप की प्रतिक्रिया बताती है कि वह भारत की इन बातों को व्यक्तिगत और नीतिगत चुनौती मान रहे हैं। भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका, और प्रधानमंत्री मोदी की मुखर विदेश नीति ने विश्व मंच पर भारत को आत्मविश्वासी भूमिका में ला खड़ा किया है—जो अमेरिका को असहज कर सकती है।
यदि ट्रंप अपने टैरिफ की धमकी को लागू करते हैं, तो इसका असर भारत के उन उत्पादों पर पड़ सकता है जो अमेरिका को निर्यात किए जाते हैं—जैसे इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल और आईटी सेवाएं। इससे भारतीय निर्यातकों पर लागत बढ़ेगी और प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ेगी। हालांकि, इससे खुद अमेरिकी कंपनियों पर भी असर पड़ेगा जो भारत के साथ सस्ते उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला में गहराई से जुड़ी हैं।
कुल मिलाकर, ट्रंप की धमकी भारत के लिए चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन यह भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और वैश्विक नेतृत्व क्षमता की भी परीक्षा है। भारत को अब संतुलन साधना होगा—जहां वह ब्रिक्स के मंच से अपनी आवाज बुलंद रखे, लेकिन अमेरिका के साथ व्यापारिक सहयोग की संभावनाएं भी खुली रखे।