मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जबरन धर्म परिवर्तन का एक गंभीर और विचलित कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसमें शुभम गोस्वामी नामक एक हिंदू युवक ने आरोप लगाया है कि उसे एक मुस्लिम लड़की से संबंध होने के बाद उसके परिवार ने भय, दबाव और झूठे मुकदमों के माध्यम से इस्लाम कबूल करने पर मजबूर कर दिया। शुभम के अनुसार, 2022 के अंत में उसका उस मुस्लिम लड़की से प्रेम संबंध बना, लेकिन यह रिश्ता लड़की के परिवार को मंजूर नहीं था। उन्होंने शुभम के खिलाफ अपहरण, बलात्कार और पॉक्सो जैसी गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज करा दिया, जिसके कारण वह लगभग चार महीने जेल में रहा। जेल से छूटने के बाद भी मामले की कानूनी कार्रवाई जारी रही और इसी बीच लड़की के परिजनों ने शुभम पर दबाव डालते हुए कहा कि केस तभी वापस लिया जाएगा जब वह हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम स्वीकार कर ले। लगातार दो महीने तक दबाव, धमकी और मानसिक प्रताड़ना सहने के बाद शुभम ने मार्च 2023 में भोपाल की आम वाली मस्जिद में इस्लाम कबूल कर लिया और उसे नई पहचान ‘अमान खान’ दी गई।
धर्म परिवर्तन के तुरंत बाद शुभम को रायसेन में तीन दिनों की जमात पर भेजा गया और इसके बाद धार्मिक गतिविधियों में लगातार शामिल होने के लिए बाध्य किया जाता रहा। जब उसने लड़की से शादी करने की बात उठाई, तो परिवार ने उसे कर्नाटक में 130 दिनों की जमात पर भेज दिया, जहाँ उसे गोमांस खाने के लिए मजबूर किया गया और पूर्णतः मुस्लिम जीवनशैली अपनाने को कहा गया। लगभग तीन साल तक वह अपने परिवार, समाज और अपनी वास्तविक पहचान से दूर मुस्लिम मोहल्ले में ‘अमान खान’ के रूप में रहता रहा। शुभम का आरोप है कि इस दौरान उस पर मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से अत्याचार किए गए और उसकी हर गतिविधि पर लड़की के परिवार का नियंत्रण रहा। यहाँ तक कि यह धमकी दी गई कि यदि वह कभी हिंदू धर्म में वापसी करने की कोशिश करेगा तो उसे और उसके परिवार को मार दिया जाएगा।
आखिरकार 20 नवंबर 2025 को शुभम अपने दो दोस्तों के साथ जहाँगीराबाद थाने पहुँचा और अब्दुल नईम, उसके बेटे अब्दुल नदीम और उसकी पत्नी शमा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 3(5) और 251(2) सहित मध्य प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2021 की धारा 3 और 5 के तहत एफआईआर दर्ज की। तीनों आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद भोपाल जिला कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि आरोप अत्यंत गंभीर हैं, सामाजिक सद्भाव को खतरा पहुँचाते हैं और जाँच के दौरान आरोपितों को रिहा करने से सबूतों व गवाहों पर असर पड़ सकता है।
शुभम ने मंत्री विश्वास कैलाश सारंग से मिलकर अपनी पीड़ा साझा की। मंत्री ने कहा कि उसकी कहानी दिल दहला देने वाली है और राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि शुभम सुरक्षित रूप से ‘घर वापसी’ कर अपनी मूल पहचान वापस पा सके। तीन साल की मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक यातना झेल चुके शुभम अब सनातन धर्म में वापस लौटना चाहता है और अपनी जिंदगी को फिर से सँवारने की कोशिश कर रहा है।
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