वैश्विक व्यापार व्यवस्था में तेजी से बदलाव आ रहा है और टैरिफ अब केवल आर्थिक नीति का हिस्सा नहीं रह गए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि आज के दौर में अंतरराष्ट्रीय व्यापार को रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका और मेक्सिको जैसे देशों के हालिया फैसलों के बीच भारत को अपने आर्थिक हितों की रक्षा करते हुए समझदारी और मजबूती के साथ बातचीत करनी होगी।
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि टैरिफ और अन्य व्यापारिक उपायों के जरिए वैश्विक व्यापार को “हथियार” बनाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय माहौल में भारत को केवल शुल्क संरचना पर नहीं, बल्कि अपनी समग्र आर्थिक ताकत के आधार पर निर्णय लेने होंगे। उनके अनुसार, मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था ही भारत को वैश्विक वार्ताओं में अतिरिक्त बढ़त दिलाएगी।
🚨Tariffs are weaponized, global trade isn’t fair: Finance Minister Nirmala Sitharaman
India is lectured as the ‘tariff king,’ but we've never weaponized trade, only safeguarded our industries from predatory flooding, she said at the IEC'25 forum. pic.twitter.com/RfdCH4EKh4
— Sputnik India (@Sputnik_India) December 17, 2025
सीतारमण की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका ने भारत के साथ व्यापार घाटे का हवाला देते हुए पहले 25 प्रतिशत शुल्क लगाया और बाद में रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण अतिरिक्त 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क भी जोड़ा। इसी कड़ी में मेक्सिको ने भी भारत सहित कई देशों से आयात पर भारी टैरिफ बढ़ाने की घोषणा की है, जिससे वैश्विक व्यापार पर दबाव बढ़ा है।
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत को अक्सर ‘इनवर्ड लुकिंग’ और ‘टैरिफ किंग’ कहकर आलोचना का सामना करना पड़ता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि आज कई देश खुले तौर पर टैरिफ बढ़ा रहे हैं, लेकिन उन पर उतने सवाल नहीं उठते। उन्होंने इसे वैश्विक व्यापार व्यवस्था में उभरता हुआ दोहरा मापदंड बताया।
सीतारमण ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत का उद्देश्य कभी टैरिफ को हथियार के रूप में इस्तेमाल करना नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि देश ने केवल अपने घरेलू उद्योगों को अनुचित और आक्रामक प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए ऐसे कदम उठाए हैं। उनके अनुसार, कुछ देशों से होने वाली अत्यधिक सस्ती या अनियंत्रित आपूर्ति घरेलू बाजार और उद्योगों को नुकसान पहुंचा सकती है।
मेक्सिको के फैसले पर बात करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि वहां 2026 से उन देशों पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ बढ़ाने की योजना है, जिनके साथ उसका मुक्त व्यापार समझौता नहीं है। इससे भारत पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि भारत ने इस मुद्दे पर मेक्सिको के साथ पहले ही बातचीत शुरू कर दी है, ताकि संभावित शुल्क वृद्धि के प्रभाव को कम किया जा सके और व्यापारिक हितों की रक्षा की जा सके।
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