बांग्लादेश में जारी हिंसा के बीच सामान्य स्थिति बहाल करने की कोशिशों के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मुहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार पर तीखा हमला बोला है। एएनआई को दिए एक ईमेल इंटरव्यू में उन्होंने देश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और चरमपंथी ताकतों को बढ़ावा मिलने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि अंतरिम सरकार न केवल हिंसा को रोकने में विफल रही है, बल्कि हालात पहले से ज्यादा खराब हो गए हैं।
शेख हसीना ने इस्लामी कट्टरपंथी छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या और उसके बाद भड़की हिंसा का जिक्र करते हुए कहा कि यह अंतरिम व्यवस्था के तहत फैली ‘कानूनहीनता’ का स्पष्ट उदाहरण है। उन्होंने दावा किया कि उनकी सत्ता से बेदखली के बाद हालात तेजी से बिगड़े हैं, जिससे बांग्लादेश अंदरूनी रूप से अस्थिर हो रहा है और पड़ोसी देशों, खासकर भारत के साथ संबंधों पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।
हसीना ने कहा, “यह दुखद हत्या मेरी सरकार को उखाड़ फेंकने वाली उसी कानूनहीनता को दर्शाती है, जो यूनुस के शासन में कई गुना बढ़ गई है। हिंसा अब सामान्य बात बन चुकी है, लेकिन अंतरिम सरकार या तो इसे नकारती है या फिर इसे रोकने में पूरी तरह असहाय नजर आती है। ऐसी घटनाएँ देश को भीतर से खोखला कर रही हैं। अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न हो रहा है और वर्षों में जो कुछ भी हमने बनाया, उसे नष्ट किया जा रहा है। यही यूनुस के बांग्लादेश की सच्चाई है।”
ANI के साथ एक ईमेल इंटरव्यू में, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस्लामी प्रभाव और सुरक्षा चिंताओं पर बात करते हुए कहा, "मैं इस चिंता को साझा करती हूं, जैसा कि लाखों बांग्लादेशी करते हैं जो उस सुरक्षित, धर्मनिरपेक्ष देश को पसंद करते हैं जो हम कभी थे। यूनुस ने… pic.twitter.com/ncRo5nYIj4
— ANI_HindiNews (@AHindinews) December 22, 2025
इंटरव्यू में शेख हसीना ने इस्लामी चरमपंथियों के बढ़ते प्रभाव पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरिम सरकार ने सजा पाए आतंकवादियों को रिहा किया और चरमपंथी तत्वों को शासन में जगह दी। उनका दावा था कि यूनुस ने ऐसे लोगों को कैबिनेट पदों पर बिठाया है, जिनके संबंध अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों से रहे हैं, और उन्हें सार्वजनिक जीवन में अहम भूमिकाएँ दी गई हैं। हसीना के अनुसार, यूनुस को इतने जटिल देश को चलाने का कोई प्रशासनिक अनुभव नहीं है।
भारत के पूर्वोत्तर और ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर को लेकर हो रही बयानबाजी पर प्रतिक्रिया देते हुए शेख हसीना ने इसे “खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना” करार दिया। उन्होंने कहा कि कट्टरपंथी ताकतें यूनुस का इस्तेमाल विदेशों में उदारवादी छवि दिखाने के लिए कर रही हैं, जबकि देश के भीतर एक कट्टर एजेंडा आगे बढ़ाया जा रहा है। उनके मुताबिक, यह स्थिति न केवल भारत बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
शेख हसीना ने जोर देकर कहा कि धर्मनिरपेक्षता बांग्लादेश की मूल शक्ति रही है, जिसे अब कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने भारत-बांग्लादेश संबंधों में आई खटास पर भी चिंता जताई और देश में बढ़ते एंटी-इंडिया प्रदर्शनों का उल्लेख किया। इस दौरान उन्होंने 27 वर्षीय हिंदू युवक दिपु चंद्रा दास की हत्या का हवाला दिया, जिसे 18 दिसंबर को कथित अपवित्रता के आरोप में भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला और शव जला दिया। इस घटना की व्यापक निंदा हुई थी और इसमें 10 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है।
चटगाँव में भारतीय वीजा एप्लीकेशन सेंटर पर हुई सुरक्षा घटना के बाद वीजा सेवाओं के निलंबन का जिक्र करते हुए हसीना ने कहा कि भारत की चिंताएँ पूरी तरह जायज हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यूनुस सरकार की शह पर चरमपंथी अल्पसंख्यकों, मीडिया संस्थानों और राजनयिक मिशनों को निशाना बना रहे हैं।
उन्होंने कहा, “एक जिम्मेदार सरकार डिप्लोमैटिक मिशनों की रक्षा करेगी और उन्हें धमकाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। इसके बजाय यूनुस गुंडों को खुली छूट देता है और उन्हें योद्धा कहता है।”
एएनआई को दिए इंटरव्यू में शेख हसीना ने बढ़ते एंटी-इंडिया सेंटिमेंट पर कहा कि यह शत्रुता चरमपंथियों द्वारा जानबूझकर पैदा की जा रही है, जिन्हें यूनुस शासन ने प्रोत्साहित किया है। उनके अनुसार, यही वे लोग हैं जो भारतीय दूतावास पर मार्च करते हैं, मीडिया कार्यालयों पर हमले करते हैं, अल्पसंख्यकों को निशाना बनाते हैं और जिन्होंने उन्हें तथा उनके परिवार को जान बचाने के लिए देश छोड़ने पर मजबूर किया।
गौरतलब है कि बांग्लादेश में प्रदर्शन और तोड़फोड़ की घटनाएँ लगातार जारी हैं, जिनमें मीडिया हाउसों पर हमले भी शामिल हैं। फरवरी 2026 में प्रस्तावित आम चुनावों से पहले देश का राजनीतिक माहौल बेहद अस्थिर बना हुआ है।
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