भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखने के संकेत देकर यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में बयान दिया कि भारत अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थितियों और अपने उपभोक्ताओं की सुरक्षा के अनुसार निर्णय लेता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत रूस से उसी मूल्य सीमा के अंतर्गत तेल खरीद रहा है, जिसे अमेरिका ने निर्धारित किया है — यानी रूस के कच्चे तेल पर लगे मूल्य कैप के अनुरूप।
2022 में जब रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ था, तब वैश्विक स्तर पर यह आशंका व्यक्त की गई थी कि तेल की कीमतें बेकाबू हो सकती हैं और यह 125 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। यह स्थिति कोरोना महामारी के बाद की वैश्विक आर्थिक रिकवरी के लिए घातक साबित हो सकती थी। लेकिन ऐसे समय में रूस ने अपने कच्चे तेल को भारी छूट पर बेचना शुरू किया, जिसे भारत ने एक रणनीतिक अवसर के रूप में लिया। भारत के अलावा चीन और ब्राज़ील ने भी इस सस्ते तेल का लाभ उठाया।
एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत फिलहाल प्रतिदिन लगभग 1.7 मिलियन बैरल कच्चा तेल रूस से आयात कर रहा है। इससे तैयार पेट्रोलियम उत्पादों का भारत 1.4 मिलियन बैरल यूरोप और अन्य देशों को निर्यात कर रहा है। इस रणनीति से भारत को दोहरा लाभ हुआ है— एक ओर उसे घरेलू जरूरतों के लिए सस्ता कच्चा तेल मिल रहा है, और दूसरी ओर वह अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन उत्पाद बेचकर लाभ भी कमा रहा है। साथ ही भारत की भूमिका कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों को 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण रही है।
भले ही अमेरिका की तरफ से रूस के तेल पर प्रतिबंध और चेतावनी दी गई हो, भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी ऊर्जा रणनीति में किसी बाहरी दबाव को प्राथमिकता नहीं देगा। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के तेल आयात पर 25 प्रतिशत टैरिफ और जुर्माना लगाने की धमकी के बावजूद भारत ने अपना रुख नहीं बदला। एक प्रमुख तेल कंपनी के निदेशक ने जानकारी दी कि सरकार ने कंपनियों को यह स्वतंत्रता दी है कि वे जहां से सस्ता और विश्वसनीय तेल मिल सकता है, वहां से खरीदें। इससे भारत की ऊर्जा नीति की स्वायत्तता और व्यावहारिक सोच का परिचय मिलता है।
इसके अलावा, भारत अब केवल पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर नहीं रहकर नॉर्वे और इक्कानोर (Equinor) जैसे नए स्रोतों से भी एलएनजी (LNG) और अन्य ऊर्जा उत्पाद खरीदने की दिशा में अग्रसर है। यह भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बहुआयामी रणनीति का हिस्सा है। भारत का यह रुख न केवल उसकी ऊर्जा आवश्यकता की पूर्ति करता है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा स्थिरता में भी योगदान देता है।
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