राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने शताब्दी वर्ष की तैयारियों के तहत समाज के सभी वर्गों और क्षेत्रों के प्रमुख नागरिकों से संवाद का व्यापक अभियान शुरू करने जा रहा है। इस महत्त्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत देशभर में जिला स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक हज़ार से अधिक स्थानों पर प्रमुख नागरिक गोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा। इन आयोजनों का उद्देश्य संघ के विचारों, उसके कार्यों और भविष्य की दिशा पर समाज के विविध वर्गों से संवाद स्थापित करना है। चार प्रमुख महानगरों—दिल्ली, मुंबई (फरवरी 2025), कोलकाता और बेंगलुरु (नवंबर 2025)—में बड़ी व्याख्यानमालाएं होंगी जिनमें स्वयं सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी की उपस्थिति रहेगी। इसके अतिरिक्त सरकार्यवाह, सह सरकार्यवाह और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी भी विभिन्न स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेंगे।
इसी श्रृंखला में, दिल्ली के विज्ञान भवन में 26, 27 और 28 अगस्त को तीन दिवसीय व्याख्यानमाला का आयोजन किया जा रहा है। इस संबंध में केशव कुंज में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर जी ने विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह व्याख्यानमाला समाज के सभी क्षेत्रों—सामाजिक, आर्थिक, आध्यात्मिक, शैक्षिक, खेल, भाषा, उद्यमिता, ज्ञान परंपरा और विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों—से जुड़ी प्रतिष्ठित हस्तियों को आमंत्रित कर आयोजित की जा रही है। कुल 17 प्रमुख श्रेणियों और 138 उप-श्रेणियों के आधार पर आमंत्रण भेजे जा रहे हैं, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि समाज के हर कोने से प्रभावशाली सहभागिता हो।
व्याख्यानमाला के विषयों पर प्रकाश डालते हुए श्री आंबेकर जी ने कहा कि इसमें संघ की 100 वर्षों की यात्रा, स्वयंसेवकों की भूमिका, उनके अनुभव, और आगे संघ को किन क्षेत्रों में विस्तार करना है—इन सभी पर चर्चा होगी। सरसंघचालक जी स्वयं संघ की सोच और दिशा पर विस्तृत विचार व्यक्त करेंगे। पंच परिवर्तन (पाँच प्रमुख सामाजिक बदलाव) पर भी संघ की दृष्टि रखी जाएगी, और इसमें समाज की आवश्यक सहभागिता पर विमर्श होगा। देश आज आशाओं और आकांक्षाओं से भरे नए युग में प्रवेश कर चुका है, जहाँ स्वयंसेवकों के योगदान और स्वत्व आधारित विकास की आवश्यकता पर विशेष बल दिया जाएगा।
संघ इस व्याख्यानमाला के माध्यम से यह संदेश देना चाहता है कि उसका विचारधारा कोई अलग या बाहरी नहीं है, बल्कि यह भारत की परंपरा, संस्कृति और स्वदेशी मूल्य प्रणाली पर आधारित है। संघ का उद्देश्य सबको साथ लेकर देश को आगे ले जाना है। संघ के स्वयंसेवक स्वावलंबी भारत जैसे अभियानों में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं—चाहे वह सामाजिक सेवा हो, शिक्षा हो या ग्रामीण विकास।
तीसरे दिन व्याख्यानमाला का विशेष आकर्षण होगा सरसंघचालक जी द्वारा लिखित प्रश्नों का उत्तर देना। यह सेशन संवाद की भावना को और भी प्रगाढ़ बनाएगा। इस ऐतिहासिक आयोजन में दिल्ली प्रांत संघचालक डॉ. अनिल अग्रवाल जी भी उपस्थित रहेंगे।
यह व्याख्यानमाला न केवल संघ के विचारों को सामने लाने का माध्यम होगी, बल्कि यह देश के चिंतनशील नागरिकों को एक साझा मंच पर लाकर राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के बड़े उद्देश्य की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल भी साबित होगी।
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