प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा के दौरान भारत और इस द्वीपीय देश के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा भारत के डिजिटल भुगतान सिस्टम यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI को लेकर हुए समझौते की हो रही है। इस MoU के बाद सेशेल्स में भी UPI आधारित डिजिटल पेमेंट सिस्टम लागू करने का रास्ता साफ हो गया है।
भारत और सेशेल्स के बीच हुए इस समझौते को केवल डिजिटल भुगतान सुविधा का विस्तार नहीं, बल्कि भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। UPI के जरिए भारतीय पर्यटक, व्यापारी और प्रवासी आने वाले समय में सेशेल्स में अधिक आसानी से डिजिटल भुगतान कर सकेंगे।
सेशेल्स में UPI क्यों अहम है?
सेशेल्स हिंद महासागर क्षेत्र का महत्वपूर्ण द्वीपीय देश है और पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था के लिए जाना जाता है। हर साल बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटक सेशेल्स जाते हैं। ऐसे में UPI लागू होने से भारतीयों को स्थानीय मुद्रा बदलने या अंतरराष्ट्रीय कार्ड पर अधिक निर्भर रहने की जरूरत कम होगी।
भारतीय यात्री अपने मोबाइल में मौजूद UPI ऐप के जरिए सीधे भुगतान कर सकेंगे। इससे होटल, रेस्टोरेंट, स्थानीय बाजार, पर्यटन सेवाओं और छोटे व्यापारियों को भी डिजिटल पेमेंट का फायदा मिल सकता है।
I annan rezilta konkret dan sa vizit Sesel.
Bann lakor kle in ganny sinyen.
Sa i enkli en lakor pour enplimantasyon UPI (en form peyman nimerik) dan Sesel, lakor lo Jan Aushadhi e lezot ankor.
Nou pou kontinyen travay dan bann sekter inovan parey aksyon klimatik, Idrozenn… https://t.co/moEuVd05At
— Narendra Modi (@narendramodi) June 29, 2026
UPI क्या है और कैसे काम करता है?
UPI यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस एक रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट सिस्टम है, जिसे नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने विकसित किया है। इसकी शुरुआत अप्रैल 2016 में हुई थी। इसका उद्देश्य मोबाइल के जरिए सीधे बैंक खाते से तुरंत पैसे भेजने और प्राप्त करने की सुविधा देना था।
UPI की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें बैंक अकाउंट नंबर या IFSC कोड याद रखने की जरूरत नहीं होती। उपयोगकर्ता मोबाइल नंबर, QR कोड या वर्चुअल पेमेंट एड्रेस के जरिए कुछ ही सेकंड में भुगतान कर सकता है। यही वजह है कि आज छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक UPI का व्यापक उपयोग हो रहा है।
10 साल में UPI ने कैसे बदली भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था?
UPI ने अप्रैल 2016 में केवल 21 बैंकों और बेहद कम ट्रांजैक्शन के साथ शुरुआत की थी। लेकिन 10 वर्षों में यह भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। आज UPI से 700 से अधिक बैंक जुड़े हैं और भारत के अधिकांश डिजिटल भुगतान इसी प्लेटफॉर्म के जरिए किए जाते हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 में UPI के जरिए 24,162 करोड़ से अधिक ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल कीमत करीब ₹314 लाख करोड़ रही। यानी 10 वर्षों में UPI ने ट्रांजैक्शन की संख्या और मूल्य दोनों में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की है। आज भारत में रोजाना करोड़ों लोग UPI के जरिए भुगतान कर रहे हैं।
दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट प्लेटफॉर्म बना UPI
UPI को अब दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट सिस्टम में गिना जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का यह मॉडल चर्चा में है। IMF सहित कई वैश्विक संस्थाओं ने UPI को डिजिटल भुगतान और वित्तीय समावेशन के सफल उदाहरण के रूप में देखा है।
UPI ने भारत में नकदी पर निर्भरता कम की है, छोटे व्यापारियों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ा है और आम लोगों के लिए भुगतान को तेज, आसान और सुरक्षित बनाया है।
किन देशों तक पहुंच चुका है UPI?
भारत का UPI अब केवल घरेलू भुगतान प्रणाली नहीं रह गया है। पिछले कुछ वर्षों में इसे कई देशों में स्वीकार्यता मिली है। सिंगापुर, UAE, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, कतर और अन्य देशों में UPI से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार हो चुका है।
अब सेशेल्स भी भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़ने जा रहा है। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की तकनीकी और आर्थिक उपस्थिति और मजबूत होगी।
भारत को क्या फायदा होगा?
सेशेल्स में UPI लागू होने से भारत को कई स्तरों पर फायदा होगा। सबसे बड़ा लाभ भारतीय पर्यटकों और कारोबारियों को मिलेगा। विदेश यात्रा के दौरान भुगतान आसान होने से यात्रा अनुभव बेहतर होगा और डिजिटल लेनदेन की लागत भी कम हो सकती है।
दूसरा बड़ा फायदा भारत की फिनटेक कंपनियों को मिलेगा। UPI के अंतरराष्ट्रीय विस्तार से भारतीय डिजिटल पेमेंट टेक्नोलॉजी को नए बाजार मिलेंगे। इससे भारत की डिजिटल सॉफ्ट पावर भी बढ़ेगी।
तीसरा फायदा द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को मिल सकता है। भारत पहले से सेशेल्स को दवाइयां, चावल, कपड़े, वाहन, मशीनरी और अन्य सामान निर्यात करता है। डिजिटल भुगतान व्यवस्था मजबूत होने से व्यापारिक लेनदेन और आसान हो सकता है।
सेशेल्स के लिए भी बड़ा अवसर
सेशेल्स जैसे पर्यटन-आधारित देश के लिए UPI आधारित भुगतान व्यवस्था विदेशी पर्यटकों को सुविधा देने में मददगार साबित हो सकती है। भारतीय पर्यटकों के लिए डिजिटल पेमेंट आसान होगा, जिससे पर्यटन क्षेत्र को सीधा लाभ मिल सकता है।
स्थानीय व्यापारी, होटल, रेस्टोरेंट और पर्यटन सेवाएं भी डिजिटल भुगतान स्वीकार कर अधिक ग्राहकों तक पहुंच बना सकेंगे। इससे कैशलेस पेमेंट, पारदर्शिता और लेनदेन की गति बढ़ेगी।
UPI के साथ भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर दुनिया में
भारत UPI के साथ-साथ आधार, डिजिलॉकर और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म को भी कई देशों के साथ साझा करने की दिशा में काम कर रहा है। यह भारत की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके जरिए वह डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का वैश्विक मॉडल पेश कर रहा है।
भारत का “इंडिया स्टैक” मॉडल अब विकासशील देशों के लिए डिजिटल गवर्नेंस और वित्तीय समावेशन का सफल उदाहरण बनता जा रहा है। UPI इसका सबसे मजबूत चेहरा बनकर उभरा है।
AI के साथ UPI की अगली उड़ान
UPI का अगला चरण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ा हो सकता है। NPCI वॉयस पेमेंट, बहुभाषी सुविधा, फ्रॉड डिटेक्शन और डिजिटल क्रेडिट जैसे क्षेत्रों में काम कर रहा है। इससे ऐसे लोग भी डिजिटल भुगतान से जुड़ सकेंगे, जिन्हें अंग्रेजी या स्मार्टफोन का अधिक अनुभव नहीं है।
AI आधारित वॉयस असिस्टेंट के जरिए भविष्य में लोग अपनी भाषा में बोलकर भुगतान कर सकेंगे। इससे ग्रामीण भारत, बुजुर्गों और नए डिजिटल उपयोगकर्ताओं को बड़ा फायदा मिल सकता है।
मोदी की सेशेल्स यात्रा में कई और समझौते
UPI के अलावा प्रधानमंत्री मोदी की सेशेल्स यात्रा के दौरान स्वास्थ्य, कृषि, अंतरिक्ष, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और विकास परियोजनाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण समझौते हुए। भारत ने सेशेल्स के विकास कार्यों के लिए ₹1,250 करोड़ की लाइन ऑफ क्रेडिट भी घोषित की है।
इन समझौतों से भारत और सेशेल्स के बीच रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है।
निष्कर्ष
सेशेल्स में UPI लागू करने का समझौता भारत के डिजिटल भुगतान मॉडल की वैश्विक सफलता का नया अध्याय है। 10 साल पहले शुरू हुआ UPI आज दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम में शामिल हो चुका है। अब इसका विस्तार सेशेल्स जैसे रणनीतिक द्वीपीय देश तक होना भारत की डिजिटल ताकत और बढ़ती वैश्विक भूमिका को दर्शाता है।
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