केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के नासिक स्थित नए उत्पादन केंद्र से तेजस LCA Mk-1A लड़ाकू विमान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने तेजस एमके-1ए की तीसरी उत्पादन लाइन और एचटीटी-40 विमान की दूसरी उत्पादन लाइन का भी उद्घाटन किया। यह दिन भारतीय रक्षा उद्योग के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ, क्योंकि नासिक से पहली बार स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस Mk-1A ने उड़ान भरी। उद्घाटन समारोह में उपस्थित रक्षा मंत्री ने गर्वपूर्वक कहा कि “आज मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो गया है,” क्योंकि उन्होंने भारत में निर्मित अत्याधुनिक जेट विमानों को आकाश में उड़ान भरते देखा।
तेजस लड़ाकू विमान अब तक बेंगलुरु की दो उत्पादन इकाइयों में बनता था, जहां प्रति वर्ष 16 विमान निर्मित किए जाते हैं। नासिक की यह तीसरी उत्पादन लाइन 150 करोड़ रुपये के निवेश से तैयार की गई है, जो प्रति वर्ष 8 अतिरिक्त विमानों का उत्पादन करेगी। इस प्रकार, HAL की कुल उत्पादन क्षमता बढ़कर 24 विमानों प्रति वर्ष हो जाएगी। यह भारतीय वायुसेना (IAF) की स्क्वाड्रन शक्ति को बढ़ाने और उसके पुराने मिग-21 विमानों की जगह भरने में मदद करेगा।
#WATCH | Maharashtra | HAL manufactured LCA Tejas Mk 1A, HTT-40 basic trainer aircraft and Su-30 MKI flying at the inauguration of the third line of LCA Mark 1A and second line of HTT-40 at HAL facility in Nashik. https://t.co/OhSUaXT5Fo pic.twitter.com/w5fWhGoR0P
— ANI (@ANI) October 17, 2025
अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने कहा कि नासिक की यह भूमि न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि “आत्मनिर्भर भारत” की सच्ची मिसाल भी है। उन्होंने कहा कि इस शहर की मिट्टी में आस्था और औद्योगिक प्रगति दोनों की गूंज सुनाई देती है। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “नासिक का HAL कैंपस भारत की रक्षा शक्ति और स्वावलंबन का प्रतीक है।” रक्षा मंत्री ने कहा कि आज भारत उन चीजों का उत्पादन कर रहा है जिन्हें पहले विदेशी देशों से खरीदा जाता था — चाहे वह फाइटर एयरक्राफ्ट, मिसाइल सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, या एविएशन इंजन हों।
राजनाथ सिंह ने यह भी उल्लेख किया कि भारत आज केवल रक्षा क्षेत्र में ही नहीं बल्कि स्पेस और एयरोस्पेस इंडस्ट्री में भी तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। उन्होंने कहा कि “Make in India” अभियान ने स्थानीय विनिर्माण को प्रोत्साहित किया है और आज भारतीय कंपनियाँ उन्नत एयरोस्पेस उपकरणों का उत्पादन कर रही हैं, जो पहले आयात पर निर्भर थे।
तेजस Mk-1A की पहली उड़ान और HAL नासिक में तीसरी उत्पादन लाइन का शुभारंभ भारत की रक्षा क्षमताओं में एक रणनीतिक परिवर्तन का संकेत है। यह कदम न केवल वायुसेना की परिचालन क्षमता को बढ़ाएगा बल्कि भारत की वैश्विक रक्षा निर्माण क्षमता को भी नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा। तेजस Mk-1A की तुलना में पाकिस्तान और चीन द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित JF-17 थंडर तकनीकी रूप से कमतर है। तेजस में अधिक उन्नत AESA रडार, बेहतर इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, और व्यापक हथियार एकीकरण की क्षमता है।
तेजस Mk-1A की विशेषताएं इसे भारत की रक्षा रणनीति का मुख्य स्तंभ बनाती हैं। यह 4.5 पीढ़ी का बहु-भूमिका वाला (multi-role) विमान है जो हवाई युद्ध, जमीनी हमले और समुद्री मिशनों में समान रूप से सक्षम है। इसमें हवा में ईंधन भरने की क्षमता (air-to-air refuelling), उन्नत एवियोनिक्स, स्मार्ट हथियार सिस्टम, और 64% से अधिक स्वदेशी घटकों का उपयोग किया गया है। इसकी स्पीड 1.8 माख तक पहुँच सकती है और यह एक साथ कई टार्गेट्स पर अटैक करने में सक्षम है।
भारत सरकार ने अगस्त 2025 में HAL को भारतीय वायुसेना के लिए 97 तेजस Mk-1A विमानों की खरीद के लिए ₹62,000 करोड़ की स्वीकृति दी थी। इन विमानों की आपूर्ति आने वाले वर्षों में वायुसेना की स्क्वाड्रन स्ट्रेंथ को पुनर्जीवित करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने हाल ही में कहा था कि नए विमानों की त्वरित आपूर्ति भारत की युद्ध तैयारी बनाए रखने के लिए आवश्यक है। HAL अधिकारियों ने भरोसा जताया है कि उत्पादन प्रक्रिया के स्थिर होने के बाद वे समय पर यह लक्ष्य पूरा कर सकेंगे।
नासिक की नई उत्पादन इकाई का उद्घाटन भारत के रक्षा क्षेत्र में “आत्मनिर्भरता की उड़ान” का प्रतीक है। यह सिर्फ एक औद्योगिक उपलब्धि नहीं, बल्कि देश की तकनीकी क्षमता और सामरिक आत्मविश्वास का प्रमाण है। आने वाले वर्षों में तेजस Mk-1A भारतीय वायुसेना की रीढ़ बनेगा, जो भारत को न केवल अपनी सुरक्षा में बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भी एक मजबूत स्थान दिलाएगा।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel