प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (4 दिसंबर 2025) को अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस के अवसर पर वन्यजीव प्रेमियों और संरक्षण कार्यकर्ताओं को शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने इस मौके पर अपने कार्यकाल में शुरू किए गए महत्वाकांक्षी ‘प्रोजेक्ट चीता’ की उपलब्धियों का विशेष उल्लेख किया और कहा कि शुरुआत में इसका मजाक उड़ाने वाले विपक्षी दल अब इसके परिणाम देखकर शांत हैं।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने X (पूर्व में ट्विटर) पर तीन पोस्ट करते हुए कहा कि चीता पृथ्वी के सबसे अद्भुत जीवों में से एक है और उसकी रक्षा करना भारत की प्रतिबद्धता का हिस्सा है। उन्होंने लिखा कि तीन साल पहले शुरू किए गए प्रोजेक्ट चीता का उद्देश्य इस शानदार जानवर को सुरक्षित वातावरण देना और उसके प्राकृतिक सिस्टम को फिर से जीवित करना था।
On International Cheetah Day, my best wishes to all wildlife lovers and conservationists dedicated to protecting the cheetah, one of our planet’s most remarkable creatures. Three years ago, our Government launched Project Cheetah with the aim of safeguarding this magnificent… pic.twitter.com/FJgfJqoGeA
— Narendra Modi (@narendramodi) December 4, 2025
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि
- भारत अब कई चीतों का घर बन चुका है।
- इनमें बड़ी संख्या भारत में जन्मे चीतों की है।
- खासतौर पर कुनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधी सागर अभयारण्य में चीते तेजी से पनप रहे हैं।
पीएम मोदी ने बढ़ते चीता पर्यटन पर खुशी जताई और विश्वभर के वन्यजीव प्रेमियों को भारत आने और अपने प्राकृतिक आवास में चीतों को देखने का निमंत्रण दिया।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि चीता संरक्षण में मिली सफलता भारत की सामूहिक भावना का प्रतीक है। समर्पित “चीता मित्रों” और स्थानीय समुदायों के सहयोग को उन्होंने इस अभियान की रीढ़ बताया।
प्रोजेक्ट चीता का इतिहास और उस समय हुआ विरोध
17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री मोदी ने अपने जन्मदिन के दिन मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से लाए गए 8 चीतों को छोड़कर इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी। लेकिन शुरू से ही इस परियोजना पर विपक्ष के सवाल और तंज जारी रहे।
- कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसे “नौटंकी” बताया।
- राहुल गांधी ने भी प्रोजेक्ट पर व्यंग्य किए।
- महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले ने तो आरोप लगाया कि चीतों को भारत में लाकर “लम्पी वायरस फैलाने” की तैयारी है।
- श्योपुर के एक स्थानीय कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि “ये चीते नहीं, बिल्लियाँ हैं” और इसे पैसे की बर्बादी बताया।
जब नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से आए कुछ चीतों की प्राकृतिक कारणों से मौत हुई, तब और अधिक राजनीति गरमा गई। विपक्ष ने इसे एक असफल प्रोजेक्ट करार देने की कोशिश की।
लेकिन परिणामों ने विरोधियों को कराया शांत
1950 के दशक में भारत में चीतों को विलुप्त घोषित कर दिया गया था। लंबे समय तक प्रयासों के बाद जनवरी 2022 में ‘Action Plan for Introduction of Cheetah in India’ तैयार किया गया, जिसके तहत पाँच सालों में 50 चीतों को फिर से बसाने का लक्ष्य रखा गया।
कूनो राष्ट्रीय उद्यान में कुल 20 चीते छोड़े गए —
- 8 चीते (सितंबर 2022) नामीबिया से
- 12 चीते (फरवरी 2023) दक्षिण अफ्रीका से
शुरुआती आशंकाओं के बावजूद प्रोजेक्ट ने तीन वर्षों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की।
3 साल बाद स्थिति — प्रोजेक्ट चीता की बड़ी उपलब्धि
दिसंबर 2025 तक:
- भारत में 32 चीते सुरक्षित मौजूद हैं
- इनमें से 21 चीते भारत में ही जन्मे शावक हैं
- यह किसी भी देश में बड़े मांसाहारी जानवर के पुनर्वास की सबसे तेज और सफल वृद्धि मानी जा रही है
हाल ही में भारत में जन्मी मादा चीता ‘मुखी’ ने नवंबर 2025 में 5 स्वस्थ शावकों को जन्म दिया, जो इस प्रोजेक्ट की मजबूती और बेहतर भविष्य का संकेत देता है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत का प्राकृतिक वातावरण और संरक्षण का तरीका चीतों की वृद्धि के लिए बेहद अनुकूल साबित हो रहा है। प्रोजेक्ट अब दुनिया के सफलतम वन्यजीव पुनर्वास कार्यक्रमों में गिना जा रहा है।
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