मिडिल ईस्ट में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद वैश्विक ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बढ़ते तनाव के बीच दुनिया वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर तेजी से देख रही है।
इसी बीच गुजरात का बनास BIO-CNG मॉडल एक सफल और टिकाऊ समाधान के रूप में उभरकर सामने आया है, जो नरेंद्र मोदी के ‘वेस्ट टू वेल्थ’ विजन को साकार करता है।
बनास डेयरी का सफल मॉडल
बनास डेयरी द्वारा विकसित यह प्रोजेक्ट गोबर जैसे पारंपरिक अपशिष्ट को स्वच्छ ईंधन (BIO-CNG) और जैविक उर्वरक में बदल रहा है। यह मॉडल न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण में मददगार है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रहा है।
सरकार का बड़ा समर्थन
भूपेन्द्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार ने BIO-CNG क्षेत्र को बजट में प्राथमिकता दी है। सहकारी दुग्ध संघों को नए प्लांट लगाने के लिए ₹60 करोड़ का विशेष प्रावधान किया गया है।
केंद्र सरकार के जलशक्ति मंत्रालय और सहकारिता विभाग के सहयोग से देश के करीब 15 राज्य इस मॉडल को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
बनास बॉयो-सीएनजी गैस मॉडल की बड़ी बातें
1. BIO-CNG प्लांट्स को प्रोत्साहन देने के लिए गुजरात सरकार ने राज्य बजट में किया 60 रुपये करोड़ का प्रावधान।
2. BIO-CNG गैस और जैविक उर्वरक की बिक्री से प्रति संयंत्र सालाना लगभग 12 करोड़ रुपये राजस्व सृजन का अनुमान।
3. परियोजना से प्रतिवर्ष लगभग 6,750 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी, ‘ग्रीन गुजरात’ के संकल्प को मिलेगा बल।
4. BIO-CNG क्षेत्र को गुजरात सरकार का बजटीय समर्थन, 60 करोड़ रुपये का आवंटन।
बनासकांठा बना मॉडल जिला
बनासकांठा में स्थापित BIO-CNG प्लांट पिछले 6 वर्षों से सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। यहां 40 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता वाले प्लांट के अलावा 5 और बड़े प्लांट्स विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें से 2 चालू हो चुके हैं।
प्रत्येक प्लांट लगभग 100 मीट्रिक टन गोबर प्रतिदिन प्रोसेस करता है, जिसकी लागत करीब ₹50-55 करोड़ है।
किसानों की आय में बढ़ोतरी
इस मॉडल से जुड़े 20-25 गांवों के 400-450 पशुपालक परिवारों को गोबर के बदले ₹1 प्रति किलोग्राम की दर से भुगतान किया जाता है। इससे किसानों को अतिरिक्त आय का नया स्रोत मिला है।
गोबर के संग्रह और परिवहन के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली का उपयोग किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण रोजगार भी बढ़ रहा है।
मल्टी-प्रोडक्ट से मजबूत अर्थव्यवस्था
यह संयंत्र प्रतिदिन:
- 1,800 किलोग्राम BIO-CNG
- 25 मीट्रिक टन ठोस जैविक उर्वरक
- 75 मीट्रिक टन तरल उर्वरक
का उत्पादन करता है। इन उत्पादों से रोजाना करीब ₹3 लाख और सालाना लगभग ₹12 करोड़ का राजस्व उत्पन्न हो रहा है।
‘विन-विन’ मॉडल
बनास BIO-CNG मॉडल किसानों, उद्योग और पर्यावरण के लिए ‘विन-विन’ साबित हो रहा है। यह दिखाता है कि कैसे हरित ऊर्जा, ग्रामीण विकास और औद्योगिक प्रगति साथ-साथ संभव है।
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