पाकिस्तान में न्यायपालिका से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने अपने जज तारिक महमूद जहांगीरी को पद से हटाते हुए 116 पन्नों का विस्तृत फैसला जारी किया है। अदालत ने कहा कि उनकी नियुक्ति अवैध थी क्योंकि उनके पास वैध LLB डिग्री नहीं थी।
जस्टिस जहांगीरी को दिसंबर 2020 में हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया था। हालांकि सितंबर 2024 में उन्हें न्यायिक कार्य करने से रोक दिया गया था। अब इस मामले में अंतिम निर्णय सामने आ चुका है।
फर्जी डिग्री पर 30 साल का कानूनी करियर
डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले की सुनवाई करने वाली बेंच में चीफ जस्टिस सरदार मुहम्मद सरफराज डोगर और जस्टिस मुहम्मद आजम खान शामिल थे।
कोर्ट ने पाया कि जहांगीरी की कानून की डिग्री शुरू से ही अमान्य थी। फैसला कराची यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार द्वारा उपलब्ध कराए गए आधिकारिक रिकॉर्ड पर आधारित है।
अदालत के अनुसार:
1988 में LLB पार्ट-1 की परीक्षा फर्जी एनरोलमेंट नंबर से दी गई।
नकल करते पकड़े जाने पर 1989 में तीन साल के लिए बैन किया गया।
1990 में दूसरे नाम “तारिक जहांगीरी” से परीक्षा दी गई।
किसी अन्य छात्र के एनरोलमेंट नंबर का इस्तेमाल किया गया।
LLB पार्ट-2 परीक्षा में भी अलग एनरोलमेंट नंबर का उपयोग किया गया।
कोर्ट ने कहा कि एक कोर्स के लिए दो अलग-अलग एनरोलमेंट नंबर होना असंभव है, इसलिए उनकी मार्कशीट और डिग्री को पूरी तरह अमान्य घोषित किया गया।
कॉलेज में दाखिला ही नहीं मिला था
गवर्नमेंट इस्लामिया लॉ कॉलेज के प्रिंसिपल ने भी अदालत को बताया कि जहांगीरी को कॉलेज में कभी औपचारिक रूप से दाखिला नहीं मिला था।
अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी की कि “जो नियुक्ति शुरू से ही अवैध हो, उसे बाद में किसी प्रशासनिक निर्णय से वैध नहीं बनाया जा सकता।”
2024 में सामने आया मामला
जहांगीरी की फर्जी डिग्री का मामला 2024 में सामने आया था। सितंबर 2024 में उन्हें न्यायिक कार्य से प्रतिबंधित कर दिया गया था। उनका दावा था कि उनका कानूनी करियर 30 वर्षों से अधिक का है।
उन्हें 30 दिसंबर 2020 को इस्लामाबाद हाई कोर्ट का जज नियुक्त किया गया था, लेकिन अब अदालत ने उनकी नियुक्ति को पूरी तरह अवैध करार दे दिया है।
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