इजरायल की संसद नेसेट ने 30 मार्च 2026 को एक अहम कानून पारित किया है। इस कानून के तहत, अगर किसी फिलिस्तीनी को इजरायली नागरिकों के खिलाफ आतंकी हमले में सैन्य अदालत दोषी ठहराती है, तो उसे फांसी की सजा दी जा सकेगी।
इस बिल को संसद में तीसरी बार पेश किया गया, जहाँ 62 सांसदों ने समर्थन में और 48 ने विरोध में वोट दिया। बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इस कानून के पक्ष में मतदान किया।
क्या है नए कानून में खास?
- दोषी को 90 दिनों के भीतर फांसी दी जा सकती है
- विशेष परिस्थितियों में समयसीमा 180 दिनों तक बढ़ाई जा सकती है
- कानून मुख्य रूप से उन मामलों पर लागू होगा, जहाँ फिलिस्तीनियों को सैन्य अदालत में दोषी ठहराया जाता है
यह कानून खासतौर पर उन अदालतों के लिए है, जहाँ फिलिस्तीनियों के मामले सुने जाते हैं, न कि इजरायली नागरिकों के।
🇮🇱 The Jewish Knesset is celebrating the passing of a law making the death penalty the default sentence for Palestinians convicted of deadly attacks in military courts.
The law is expected to apply primarily to Palestinians under the military court system, as Israelis are not… pic.twitter.com/0YLrfYMfoj
— Europa.com (@europa) March 30, 2026
क्या यह सभी पर लागू होगा?
सिद्धांत रूप से यह कानून इजरायली नागरिकों पर भी लागू हो सकता है, लेकिन व्यवहार में ऐसा कम ही होगा।
- सजा तभी दी जाएगी जब अपराध का मकसद इजरायल के अस्तित्व को खत्म करना माना जाए
राजनीति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
इस कानून पर इजरायल में अलग-अलग राय सामने आई है:
- दक्षिणपंथी नेता जैसे इतामर बेन-ग्वीर ने इसका समर्थन किया
- कई मानवाधिकार संगठनों ने इसे लेकर चिंता जताई
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने चेतावनी दी कि यह कानून जिनेवा कन्वेंशन का उल्लंघन हो सकता है और इसे लागू करना युद्ध अपराध माना जा सकता है।
The United Nations has criticised the Israeli parliament’s approval of a new death penalty law, warning that its application in the occupied Palestinian territory “would constitute a war crime.” Volker Türk, the UN’s high commissioner for human rights, described the legislation… pic.twitter.com/c6R1muoCtR
— Outlook India (@Outlookindia) April 1, 2026
मानवाधिकार संगठनों की आपत्ति
ह्यूमन राइट्स वॉच समेत कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों और नेताओं ने इस कानून को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
पेड्रो सांचेज़ सहित कुछ यूरोपीय नेताओं ने इसे “अपार्थाइड जैसा” बताया है।
ऐतिहासिक संदर्भ
इजरायल ने 1948 में स्थापना के बाद अब तक केवल एक बार फांसी की सजा दी है:
- 1962 में नाजी युद्ध अपराधी एडॉल्फ आइचमैन को फांसी दी गई थी
आगे क्या?
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह नया कानून 30 दिनों के भीतर लागू कर दिया जाएगा।
वहीं, इजरायल के कुछ मानवाधिकार संगठन इस कानून को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।
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