मद्रास हाईकोर्ट ने चेन्नई की प्राचीन मंदिर संपत्ति से जुड़ी एक अहम याचिका पर सुनवाई करते हुए ए.ए. फातिमा नाचिया की याचिका खारिज कर दी है, जिसमें उन्होंने अपने दिवंगत पति मोहम्मद इकबाल को पट्टे पर मिली मंदिर की जमीन को दोबारा हासिल करने की मांग की थी। यह संपत्ति चन्ना मल्लेश्वर और चन्ना केशवपेरुमल देवस्थानम की है, जिन्हें पेरुमल देवस्थानम के नाम से जाना जाता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मंदिरों और देवताओं के हितों की रक्षा न्यायालय का संवैधानिक कर्तव्य है और भगवान में आस्था रखने वाला कोई भी व्यक्ति मंदिर की संपत्तियों की सुरक्षा हेतु कोर्ट की शरण में आ सकता है।
न्यायमूर्ति एडी जगदीश चंदिरा ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा विवाद को अनावश्यक रूप से लंबा खींचा जा रहा है, जिसमें लगातार तकनीकी आधारों पर आवेदन दाखिल किए जा रहे हैं। दरअसल, मंदिर प्रबंधन ने 1994 में इकबाल के खिलाफ दीवानी मुकदमा दायर किया था और 2000 में कोर्ट ने उनके कब्जे से जमीन वापस लेने का आदेश दिया था। बाद में अपील के बावजूद कोई राहत नहीं मिली और इकबाल की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी फातिमा ने यह मुकदमा जारी रखा। हाईकोर्ट ने अब इस याचिका को खारिज कर मंदिर के हितों को सर्वोपरि माना है।
चन्ना मल्लेश्वर और चन्ना केशव मंदिर, जो भगवान शिव और भगवान विष्णु को समर्पित हैं, चेन्नई के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मूल में बसे हुए हैं। ‘चेन्ना’ शब्द से ही ‘चेन्नई’ नाम की उत्पत्ति मानी जाती है, जिससे ये मंदिर हिंदू समुदाय के लिए अत्यधिक धार्मिक महत्व रखते हैं। कोर्ट के इस फैसले को मंदिरों की रक्षा और उनके मूल उद्देश्य की पुनःस्थापना के रूप में देखा जा रहा है।