महाराष्ट्र विधान परिषद (MLC) चुनाव 2026 में महायुती गठबंधन ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन करते हुए 17 में से 16 सीटों पर जीत दर्ज की है। चुनाव परिणामों ने राज्य की राजनीति में महायुती की मजबूत पकड़ को साबित कर दिया है। हालांकि नासिक सीट पर बीजेपी के बागी नेता गोकुल गीते की जीत ने चुनावी समीकरणों को दिलचस्प बना दिया।
इस चुनाव में महायुती के घटक दल भारतीय जनता पार्टी (BJP), शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गुट) ने संयुक्त रूप से चुनाव लड़ा था। कुल 17 सीटों में से 6 सीटों पर उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके थे, जबकि शेष 11 सीटों पर 18 जून को मतदान कराया गया था।
11 सीटों पर मतदान, 10 पर महायुती की जीत
मतदान वाली 11 सीटों में से 10 पर महायुती उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। केवल नासिक सीट पर गठबंधन को झटका लगा, जहां बीजेपी के बागी नेता गोकुल गीते ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर शिंदे शिवसेना के उम्मीदवार को पराजित कर दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नासिक का परिणाम महायुती के लिए चेतावनी संकेत माना जा सकता है, क्योंकि यहां पार्टी के अंदरूनी असंतोष का असर सीधे चुनाव नतीजों पर दिखाई दिया।
बीजेपी और एनसीपी का शत-प्रतिशत प्रदर्शन
इस चुनाव में बीजेपी ने 11 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और सभी सीटों पर जीत हासिल करने में सफल रही। वहीं अजीत पवार की एनसीपी ने भी अपनी दोनों सीटों पर विजय दर्ज की।
शिवसेना ने कुल 4 सीटों पर चुनाव लड़ा, जिनमें से तीन पर जीत मिली जबकि नासिक सीट पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद महायुती का कुल प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा।
रिकॉर्ड मतदान ने बढ़ाया चुनाव का महत्व
विधान परिषद स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में औसतन 99.02 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो लोकतांत्रिक भागीदारी का मजबूत उदाहरण माना जा रहा है। भंडारा-गोंदिया सीट पर 100 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
इन चुनावों में महानगरपालिका, नगर परिषद, नगर पंचायत, जिला परिषद और पंचायत समितियों के निर्वाचित प्रतिनिधियों ने मतदान किया। उच्च मतदान प्रतिशत ने चुनावी मुकाबले को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया।
नागपुर में बीजेपी के राजीव पोतदार की बड़ी जीत
नागपुर विधान परिषद सीट पर बीजेपी समर्थित महायुती उम्मीदवार डॉ. राजीव पोतदार और कांग्रेस समर्थित महा विकास अघाड़ी उम्मीदवार अतुल लोंढे के बीच सीधा मुकाबला था।
मतगणना में डॉ. राजीव पोतदार को 682 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार अतुल लोंढे को केवल 130 वोट प्राप्त हुए। 11 वोट अमान्य घोषित किए गए। दिलचस्प बात यह रही कि कांग्रेस के पास 169 मतदाता होने के बावजूद उसके उम्मीदवार को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका।
नासिक में गोकुल गीते बने चर्चा का केंद्र
पूरे चुनाव में सबसे बड़ा उलटफेर नासिक सीट पर देखने को मिला। बीजेपी के बागी नेता गोकुल गीते ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की। उन्होंने शिवसेना उम्मीदवार को हराकर यह साबित किया कि स्थानीय राजनीति में उनका प्रभाव अभी भी मजबूत है।
इस परिणाम ने महायुती के भीतर मौजूद स्थानीय असंतोष और गुटबाजी को भी उजागर किया है।
महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव प्रणाली क्या है?
महाराष्ट्र विधान परिषद राज्य की द्विसदनीय विधायिका का उच्च सदन है। इसमें कुल 78 सदस्य होते हैं और प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल छह वर्ष का होता है। हर दो वर्ष में लगभग एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं और उनकी जगह नए सदस्य चुने जाते हैं।
78 सदस्यों में से:
- 30 सदस्य विधानसभा के निर्वाचित विधायक चुनते हैं।
- 22 सदस्य स्थानीय निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा चुने जाते हैं।
- 7 सदस्य स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों से चुने जाते हैं।
- 7 सदस्य शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से चुने जाते हैं।
- 12 सदस्यों को राज्यपाल द्वारा मनोनीत किया जाता है।
इस बार स्थानीय निकाय कोटे की 22 सीटों में से 17 सीटों पर चुनावी प्रक्रिया पूरी हुई, जिनमें 6 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए और 11 सीटों पर मतदान कराया गया।
महायुती के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश
विधान परिषद चुनाव के नतीजे आगामी स्थानीय निकाय और विधानसभा राजनीति के लिहाज से महायुती के लिए सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं। बीजेपी और एनसीपी का शत-प्रतिशत प्रदर्शन गठबंधन की संगठनात्मक मजबूती को दर्शाता है। वहीं नासिक का परिणाम यह भी बताता है कि स्थानीय स्तर पर बगावत और असंतोष को नजरअंदाज करना राजनीतिक रूप से महंगा पड़ सकता है।
इन नतीजों ने महाराष्ट्र की राजनीति में महायुती की बढ़त को और मजबूत कर दिया है तथा विपक्षी महा विकास अघाड़ी के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
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