Bhojshala परिसर, धार (मध्यप्रदेश) में रविवार (17 मई 2026) को पहली बार देवी सरस्वती की मूर्ति स्थापित कर विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस ऐतिहासिक मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
हाईकोर्ट फैसले के बाद बदला माहौल
हाल ही में Madhya Pradesh High Court ने ASI की रिपोर्ट के आधार पर भोजशाला को सरस्वती मंदिर माना था। इसके बाद Archaeological Survey of India ने हिंदुओं को यहाँ बिना रोक-टोक पूजा की अनुमति दी।
#WATCH | Dhar, MP | Prayers being offered to Goddess Saraswati, whose idol was consecrated at the Bhojshala complex yesterday
Bhojshala Mukti Yagna Convener Gopal Sharma says, "The High Court has directed the government that the idol (of Goddess Vagdevi) should be repatriated… pic.twitter.com/ntFB5gqIwH
— ANI (@ANI) May 18, 2026
विशेष पूजा और धार्मिक अनुष्ठान
पूजा से पहले पूरे परिसर को गंगाजल और गौमूत्र से शुद्ध किया गया। इसके बाद:
- देवी वाग्देवी (सरस्वती) की विधि-विधान से पूजा
- अखंड ज्योति को गर्भगृह में स्थापित किया गया
- आरती और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए
इस दौरान Savitri Thakur ने परिसर में भगवा ध्वज भी फहराया।
प्रवेश को लेकर विवाद
भोजशाला उत्सव समिति ने परिसर के बाहर पोस्टर लगाकर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की बात कही। समिति के सदस्य गोपाल शर्मा के अनुसार:
- केवल तिलक लगाए लोगों को प्रवेश
- भगवा गमछा पहनना अनिवार्य
इस फैसले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा और विवाद की स्थिति बनी हुई है।
सरकार का बयान
Mohan Yadav ने कहा कि सरकार भोजशाला को फिर से भव्य स्वरूप देने के लिए काम करेगी और इसे धार्मिक व सांस्कृतिक दृष्टि से विकसित किया जाएगा।
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