गुजरात के अहमदाबाद की विशेष NIA अदालत ने 2025 के कथित ISIS से जुड़े Ricin बायो-टेरर साजिश मामले में मुख्य आरोपित डॉ. सैयद अहमद मोहिउद्दीन की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने आरोपों की गंभीरता और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की धारा 43D(5) के तहत जमानत पर लागू कठोर प्रावधानों को देखते हुए राहत देने से इनकार किया।
मामले में NIA पहले ही मोहिउद्दीन और दो अन्य आरोपितों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। एजेंसी का आरोप है कि आरोपित ISIS से जुड़े विदेशी हैंडलरों के निर्देश पर काम कर रहे थे और सार्वजनिक स्थानों पर बड़े पैमाने पर लोगों को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से Ricin जैसे अत्यंत जहरीले जैविक विष के इस्तेमाल की साजिश रची गई थी।
बचाव पक्ष ने कहा- झूठे मामले में फंसाया गया
मोहिउद्दीन की ओर से पेश अधिवक्ता के. एम. दस्तूर ने अदालत में दलील दी कि उनका मुवक्किल निर्दोष है और उसे झूठे मामले में फंसाया गया है। बचाव पक्ष के मुताबिक रिकॉर्ड पर ऐसी पर्याप्त सामग्री नहीं है जिससे यह साबित हो कि मोहिउद्दीन किसी प्रतिबंधित आतंकी संगठन से जुड़ा था या लोगों को नुकसान पहुंचाना चाहता था।
बचाव पक्ष ने हथियारों की बरामदगी को लेकर भी दावा किया कि मोहिउद्दीन को कथित तौर पर यह जानकारी नहीं थी कि संबंधित बैग में क्या रखा हुआ था। Ricin से संबंधित आरोपों को भी बचाव पक्ष ने चुनौती दी।

कोर्ट को प्रथम दृष्टया मिली गंभीर सामग्री
विशेष न्यायाधीश हेमंग आर. रावल की अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि आरोपी के खिलाफ UAPA, भारतीय न्याय संहिता और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं और जांच के बाद आरोपपत्र भी दाखिल किया जा चुका है।
अदालत के समक्ष रखे अभियोजन पक्ष के रिकॉर्ड के मुताबिक मोहिउद्दीन पर अपने हैदराबाद स्थित आवास को कथित तौर पर एक गुप्त प्रयोगशाला के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप है। NIA ने भी अपने आरोपपत्र में दावा किया है कि हैदराबाद स्थित उसके घर का इस्तेमाल Ricin तैयार करने से जुड़ी गतिविधियों के लिए किया गया था।
अदालत ने मोहिउद्दीन की मेडिकल शिक्षा को भी महत्वपूर्ण माना। कोर्ट के मुताबिक उसके शैक्षणिक और मेडिकल बैकग्राउंड को देखते हुए यह दावा प्रथम दृष्टया स्वीकार करना कठिन है कि वह Ricin की प्रकृति से पूरी तरह अनजान था।

क्या है Ricin?
Ricin अरंडी के पौधे से संबंधित एक अत्यंत जहरीला जैविक विष है। यह वायरस या बैक्टीरिया नहीं है। मानव शरीर में पहुंचने पर यह कोशिकाओं के सामान्य कार्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है और पर्याप्त मात्रा में संपर्क जानलेवा हो सकता है।
NIA के अनुसार, कथित साजिश में Ricin का इस्तेमाल सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को नुकसान पहुंचाने के लिए किए जाने की योजना थी। एजेंसी ने इसे हाल के वर्षों में सामने आए गंभीर कथित बायो-टेरर मामलों में से एक बताया है।
अभियोजन का दावा- विदेशी हैंडलर के निर्देश पर काम कर रहा था डॉक्टर
जमानत का विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि मोहिउद्दीन के खिलाफ केवल Ricin से जुड़े आरोप ही नहीं हैं, बल्कि अवैध हथियार और गोला-बारूद हासिल करने के भी आरोप हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार, मोहिउद्दीन के मोबाइल फोन से विदेशी हैंडलर से कथित संपर्क से जुड़ी सामग्री मिली। अभियोजन का दावा है कि बातचीत में धन, हथियार और कथित आतंकी साजिश से संबंधित गतिविधियों पर चर्चा हुई थी।
NIA ने मई 2026 में तीन आरोपितों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करने की जानकारी देते हुए कहा था कि मोहिउद्दीन के साथ उत्तर प्रदेश के दो अन्य आरोपित भी कथित नेटवर्क का हिस्सा थे। एजेंसी ने आरोप लगाया कि विदेश में मौजूद ISIS से जुड़े हैंडलरों के मार्गदर्शन में आरोपितों ने धन, अवैध हथियार, भर्ती और अन्य गतिविधियों को लेकर समन्वय किया।
हथियार और गोला-बारूद की बरामदगी भी बनी अहम आधार
अभियोजन के अनुसार मोहिउद्दीन की गिरफ्तारी के समय अवैध हथियार, गोला-बारूद, अरंडी के तेल की बोतल और अन्य सामग्री बरामद की गई थी। NIA के सार्वजनिक विवरण के मुताबिक नवंबर 2025 में गुजरात ATS द्वारा उसकी गिरफ्तारी के बाद जांच आगे बढ़ी और उसी दिन दो अन्य आरोपित भी गिरफ्तार किए गए।
अदालत ने हथियारों के बारे में जानकारी नहीं होने की बचाव पक्ष की दलील को भी स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने आरोपपत्र और जांच सामग्री के आधार पर कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपी और कथित हैंडलरों तथा अन्य आरोपितों के बीच साजिश के संकेत दिखाई देते हैं।

दिल्ली-अहमदाबाद की यात्राओं का भी आरोपपत्र में जिक्र
अभियोजन के मुताबिक जांच में मोहिउद्दीन की विभिन्न स्थानों की यात्राओं और कथित नेटवर्क के सदस्यों से संपर्क की जानकारी भी सामने आई। आरोप है कि साजिश के लिए धन और सामग्री जुटाने तथा अन्य लोगों को नेटवर्क से जोड़ने के प्रयास किए गए।
NIA का आरोप है कि सह-आरोपितों ने भी विदेशी हैंडलरों से संपर्क रखने, कथित आतंकी धन को संभालने, रेकी करने और अवैध हथियारों की खेप एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने जैसी गतिविधियों में भूमिका निभाई। एजेंसी के अनुसार व्यापक नेटवर्क और विदेशी हैंडलरों की पहचान से संबंधित जांच जारी रही।
UAPA की धारा 43D(5) बनी जमानत में बड़ी बाधा
विशेष अदालत ने मामले में UAPA की धारा 43D(5) के तहत लागू कड़े जमानत मानकों को ध्यान में रखा। अदालत ने कहा कि उपलब्ध सामग्री प्रथम दृष्टया आरोपित की संलिप्तता की ओर संकेत करती है और आरोप बेहद गंभीर प्रकृति के हैं।
इसी आधार पर अदालत ने अपने विवेकाधीन अधिकार का इस्तेमाल मोहिउद्दीन के पक्ष में करने से इनकार करते हुए उसकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये आरोप फिलहाल अभियोजन और जांच एजेंसी के दावे हैं; आपराधिक मुकदमे में अंतिम दोष या निर्दोषता का फैसला ट्रायल के बाद अदालत करेगी।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला नवंबर 2025 में गुजरात ATS की कार्रवाई के बाद सामने आया था। बाद में NIA ने जनवरी 2026 में जांच अपने हाथ में ली। मई 2026 में NIA ने मोहिउद्दीन और दो अन्य आरोपितों के खिलाफ अहमदाबाद की विशेष अदालत में UAPA, BNS और Arms Act की संबंधित धाराओं के तहत आरोपपत्र दाखिल किया। एजेंसी का दावा है कि मामला ISIS से जुड़े विदेशी हैंडलरों द्वारा निर्देशित कथित बायो-टेरर साजिश से संबंधित है।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel