स्विट्जरलैंड के एक प्रतिष्ठित सैन्य इतिहास और रणनीति थिंक टैंक द्वारा किए गए अध्ययन में मई 2025 में भारत के ऑपरेशन सिंदूर को दक्षिण एशिया में हवाई शक्ति संतुलन बदलने वाला बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान की हवाई रक्षा और मारक क्षमता को निर्णायक रूप से कमजोर किया और चार दिनों के भीषण संघर्ष के बाद पाकिस्तान को युद्धविराम के लिए मजबूर किया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑपरेशन सिंदूर 7 से 10 मई 2025 तक 88 घंटे चला। इस दौरान भारत ने जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमले के बाद जवाबी कार्रवाई शुरू की। भारतीय वायु सेना ने जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े मुख्यालय और शिविरों पर सटीक लंबी दूरी की मिसाइल हमले किए। बहावलपुर और मुरीदके में इन हमलों ने कई इमारतों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया।

रिपोर्ट में उल्लेख है कि प्रारंभिक चरण में पाकिस्तान ने हवाई हमलों का आक्रामक जवाब दिया। पहले दिन के हवाई संघर्ष में लगभग 60 भारतीय और 40 पाकिस्तानी लड़ाकू विमान शामिल हुए। पाकिस्तानी वायु सेना ने फ्रांस से प्राप्त लंबी दूरी की PL-15 मिसाइलों और एयरबॉर्न राडार के माध्यम से भारत को नुकसान पहुँचाया। शुरुआती झड़प में कम से कम एक राफेल, एक मिराज 2000 और एक अन्य लड़ाकू विमान नष्ट या क्षतिग्रस्त हुआ।
स्विस विश्लेषकों ने बताया कि शुरुआती झड़प पाकिस्तान के लिए प्रचार और सामरिक सफलता का भ्रम पैदा कर रही थी, लेकिन भारतीय जवाबी रणनीति ने पाकिस्तान के हवाई सुरक्षा नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। भारत ने स्काल्प-ईजी और ब्रह्मोस जैसी स्टैंडऑफ क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान के प्रमुख हवाई अड्डों और बुनियादी ढांचे पर सटीक हमले किए।
रिपोर्ट में भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम और कमांड एंड कंट्रोल नेटवर्क, विशेषकर IACCCS और आकाशतीर प्रणाली की तारीफ की गई। इन प्रणालियों ने पाकिस्तानी जवाबी कार्रवाई को विफल कर दिया और भारतीय वायु श्रेष्ठता को सुनिश्चित किया।
10 मई तक पाकिस्तान के हवाई हमलों की क्षमता प्रभावहीन हो चुकी थी। स्विस रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने हवाई क्षेत्र में वास्तविक श्रेष्ठता हासिल कर ली थी और ऑपरेशन की गति और दायरे को नियंत्रित करने में सक्षम था। इसी बिंदु पर पाकिस्तान ने युद्धविराम की मांग की।
रिपोर्ट में यह भी तर्क दिया गया कि ऑपरेशन सिंदूर केवल प्रतिशोध नहीं था, बल्कि यह हवाई शक्ति का निर्णायक प्रदर्शन था जिसने उपमहाद्वीप में रणनीतिक समीकरण को पूरी तरह बदल दिया। इसके जरिए भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि भविष्य में पाकिस्तान स्थित समूहों द्वारा किए गए बड़े आतंकवादी हमलों को अलग-थलग कृत्यों के रूप में नहीं बल्कि स्टेट स्ट्रक्चर के सहयोग से होने वाला माना जाएगा।
संक्षेप में, ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सैन्य शक्ति, लचीलापन और युद्धविराम क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया और दक्षिण एशिया में हवाई श्रेष्ठता सुनिश्चित की।
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